फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Enforcement Directorate:17 साल में 5422 मामले, अब तक दोषी सिर्फ 0.46%, राहुल से सवाल कर रही ED के बारे में सबक

Sun, 31 Jul 2022 11:39 AM IST
जयदेव सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रवर्तन निदेशालय की नींव 1 मई, 1956 को पड़ी, जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 (FERA '47) के तहत वित्त मंत्रालय में एक 'प्रवर्तन इकाई' का गठन किया गया। ये इकाई विदेशी विनिमय नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन से जुड़े मामले देखती थी।
विज्ञापन
ईडी की बढ़ता दायरा। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बीते कुछ दिनों से प्रवर्तन निदेशालय यानी ED सुर्खियों में है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी इसके सवालों का समाना कर रहे हैं। इसके खिलाफ उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सड़क पर हैं। ED की पूछताछ के बीच उसके द्वारा दर्ज मामलों की सफलता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही PMLA यानी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की भी चर्चा हो रही है।

आखिर ये ED है? इसका इतिहास क्या है? PMLA क्या है जिसके तहत कार्रवाई करती है ED? क्या राहुल गांधी पर भी PMLA के तहत ही मामला दर्ज है? PMLA के तहत अब तक दर्ज  मामलों में कितने ऐसे हैं जिसमें सजा हुई है? आइये जानते हैं…

ED क्या है? 

प्रवर्तन निदेशालय की नींव 1 मई, 1956 को पड़ी, जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 (FERA '47) के तहत वित्त मंत्रालय में एक 'प्रवर्तन इकाई' का गठन किया गया। ये इकाई विदेशी विनिमय नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन से जुड़े मामले देखती थी। दिल्ली में हेडक्वॉर्टर के साथ ही मुंबई और कोलकाता में भी इसकी ब्रांच थी। 

1957 में ‘प्रवर्तन इकाई’ का नाम बदलकर ‘प्रवर्तन निदेशालय’ कर दिया गया। इसके साथ ही मद्रास में इसकी नई ब्रांच खुली। 1960 में प्रवर्तन निदेशालय का प्रशासनिक नियंत्रण आर्थिक मामलों के विभाग से राजस्व विभाग के पास आ गया।  आज भी इसका प्रशासनिक नियंत्रण वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले राजस्व विभाग के पास है। 

1991 में जब आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई तो FERA कानून को निरस्त कर दिया गया। 1 जून 2000 को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) ने इसकी जगह ली। 2002 में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (PMLA) आया। एक जुलाई 2005 से ईडी को इस कानून को लागू करने का काम मिला।  

आर्थिक अपराध करके विदेश भाग जाने के बढ़ते मामलों को देखते हुए 2018 में सरकार फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर एक्ट, 2018 (FEOA) लेकर आई। 21 अप्रैल 2018 से ईडी को इस कानून के तरह कार्रवाई करने का अधिकार मिला।   

PMLA क्या है जिसके तहत कार्रवाई करती है ED?

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 यानी PMLA 2002 में उस वक्त की अटल बिहारी बाजपेयी सरकार लेकर आई। 2005 में ईडी को इस कानून के इस्तेमाल की अनुमति मिली। उस वक्त देश में मनमोहन सिंह की सरकार थी। 

यह आपराधिक कानून मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए और मनी लॉन्ड्रिंग से अर्जित संपत्ति को जब्त करने के लिए लाया गया है। ईडी को पीएमएलए के प्रावधानों को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए उसे जांच करने, संपत्ति को अटैच करने और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने और विशेष अदालत के आदेश से संपत्ति जब्त करने का आधिकार है। 

 क्या होती है मनी लॉन्ड्रिंग?

आम भाषा में कहें तो गैर कानूनी तरीकों से बड़ी मात्रा में धन अर्जित करने और उसे फाइनेंशियल सिस्टम में डालने को मनी लॉन्ड्रिंग कहा जाता है। यानी, गैर कानूनी तरीके से कमाई गई ब्लैक मनी को वाइट मनी में बदलने की प्रक्रिया को मनी लॉन्ड्रिंग कहते हैं। इन तरीकों से ही कई बिजनेसमैन, भ्रष्ट अधिकारी, माफिया, नेता करोड़ों से लेकर अरबों रुपए तक के फ्रॉड करते हैं। 

राहुल गांधी पर क्या PMLA के तहत ही मामला दर्ज है?

विज्ञापन

2012 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीज, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे पर नेशनल हेराल्ड अखबार को धोखाधड़ी और पैसों की हेराफेरी के जरिए हड़पने का आरोप लगाया। अगस्त 2014 में ईडी ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले में सोनिया, राहुल समेत अन्य कांग्रेस नेताओं पर PMLA के तहत मामला दर्ज किया। दिसंबर 2015 से सोनिया, राहुल समेत सभी आरोपी जमानत पर हैं। अब इसी मामले में ईडी राहुल से पूछताछ कर रही है।  

PMLA के तहत अब तक कितने मामले दर्ज हुए और कितनों में हुई सजा?

एक जुलाई 2005 को लागू होने के बाद से 31 मार्च 2022 तक PMLA के तहत ईडी 5,422 मामले दर्ज हो चुकी है।  इनमें से सिर्फ 25 लोगों को दोषी ठहराया गया है। यानी, कुल दर्ज मुकदमों के मुकाबले दोषी ठहराए जाने वाले लोगों की संख्या महज 0.46 फीसदी है।  

 क्या सिर्फ नेताओं पर ही कार्रवाई करती है ED?

ऐसा नहीं है। नेताओं से इतर भी कई हाईप्रोफाइल मामले ऐसे रहे हैं, जिनमें ED सुर्खियों में आ चुकी है। इनमें नीरव मोदी, मेहुल चौकसी जैसे लोगों से जुड़े मामले शामिल हैं। इन लोगों के खिलाफ ED में चल रहे मामले के कारण रेड कॉर्नर नोटिस तक जारी है। 

चौकसी और नीरव मोदी के अलावा भी क्या किसी के खिलाफ इस तरह का रेड कॉर्नर नोटिस जारी है?

ED की वेबसाइट के मुताबिक उसकी वॉन्टेंड लिस्ट में कुल 19 नाम हैं। इन सभी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी है। इन 19 नामों में सबसे पुराना मामला अगस्ता वेस्टलैंड मामले में आरोपी कार्लो वैलेंटीनो फर्नांडो जोरेसा का है। जोरेसा के खिलाफ दिसंबर 2015 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ था। 

 पीएनबी घोटाले के आरोपी नीरव मोदी के साथ ही उनके भाई नेहल मोदी, नीशल मोदी, पत्नी अमी मोदी, नीरव के करीबी सुभाष शंकर परब, आदित्य नानावटी के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी है। आर्म डीलर संजय भंडारी, पूर्व ब्यूरोक्रेट नीतीश जे ठाकुर, एनआरआई बिजनेसमैन और ड्रग डीलिंग के आरोपी अनूप सिंह कहलो जैसे नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें