प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को महाराष्ट्र में कथित काले धन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत आठ करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। मामले में ईडी ने बताया कि, सिद्धार्थ अभय चोकशी और अभय साजनलाल चोकशी के रूप में पहचाने गए दो व्यक्तियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया गया है।
ईडी ने इन संपत्तियों को किया कुर्क
जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि जब्त की गई संपत्तियों में कर-मुक्त बॉन्ड और पुणे में मौजूद जमीन शामिल हैं और इनकी कुल कीमत 8.09 करोड़ रुपये है। मनी लॉन्ड्रिंग का मामला आयकर विभाग की तरफ से काला धन विरोधी कानून - काला धन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के तहत दायर आरोपपत्र से उपजा है।
कौन हैं सिद्धार्थ और अभय चोकसी?
ईडी के अनुसार, सिद्धार्थ अभय चोकसी और अभय साजनलाल चोकसी, सिंगापुर में बैंक खाते वाली ब्लू मिस्ट इंटरनेशनल इंक नामक ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) पंजीकृत इकाई के 'लाभकारी मालिक' थे। एजेंसी के अनुसार, अपतटीय कंपनी (ब्लू मिस्ट इंटरनेशनल इंक) ने सिंगापुर में एक संपत्ति की खरीद के लिए एचकेसीएल इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ बिक्री और खरीद समझौता किया था।
दोनों पर क्या है आरोप?
इसमें कहा गया है कि सिद्धार्थ अभय चोकशी और अभय साजनलाल चोकशी के पास कुल 8.09 करोड़ रुपये की 'अघोषित' विदेशी आय और संपत्ति है, जो इस मामले में अपराध की आय है। चूंकि इस मामले में अपराध की आय देश के बाहर है, इसलिए भारत में दोनों व्यक्तियों के स्वामित्व वाली 8.09 करोड़ रुपये की समान मूल्य की संपत्ति को अनंतिम रूप से जब्त कर लिया गया है, जैसा कि जांच एजेंसी ने बताया है।
धन शोधन निवारण अधिनियम
यह एक आपराधिक कानून है जिसे धन शोधन को रोकने के लिए और धन शोधन से प्राप्त या इसमें शामिल संपत्ति की जब्ती का प्रावधान करने के लिए तथा उससे जुड़े या उसके आनुषंगिक मामलों के लिए अधिनियमित किया गया है। प्रवर्तन-निदेशालय को अपराध की आय से प्राप्त संपत्ति का पता लगाने के लिए अन्वेषण करने, संपत्ति को अस्थायी रूप से संलग्न करने और अपराधियों के खिलाफ मुकदमा चलाने और विशेष अदालत की तरफ से संपत्ति की जब्ती सुनिश्चित करवाते हुए पीएमएलए के प्रावधानों के प्रवर्तन की जिम्मेदारी दी गई है।