अब रेलकर्मियों की विधवाओं को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी पाने के लिए शिक्षित होना जरूरी नहीं है। रेलवे बोर्ड ने बड़ी राहत देते हुए शैक्षिक योग्यता की अनिवार्यता खत्म कर दी है। नए नियम का लाभ ग्रुप डी के कर्मचारियों की विधवाओं को मिलेगा। पूर्वोत्तर रेलवे में करीब सौ से ज्यादा अनुकंपा नियुक्ति के मामले फंसे पड़े हैं, जिन्हें जल्द ही नौकरी हासिल हो जाएगी।
दरअसल, अभी तक लागू नियम के मुताबिक रेल कर्मचारियों की ड्यूटी के दौरान बीमारी या किसी अन्य कारणों से हुई मौत के बाद उनकी विधवाओं को मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पाने के लिए 10वीं उत्तीर्ण होना जरूरी है। न्यूनतम शैक्षिक योग्यता अनिवार्य होने से हमदर्दी के बावजूद रेल अफसर विधवा आवेदकों की मदद नहीं कर पाते हैं।
कई ऐसे भी मामले सामने आए, जिसमें रेलकर्मियों के बेटे उम्र कम होने के चलते नौकरी नहीं पा सके। ऐसे में परिवार के भरण-पोषण के लिए उनकी पत्नियों को ही नौकरी करनी पड़ती है। पढ़ी लिखी न होने से उनकी नियुक्ति नहीं हो पा रही थी। इसे लेकर रेल यूनियन की ओर से भी लंबे से समय से शैक्षिक योग्यता में छूट देने की मांग चल रही थी। ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्र ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने इस मामले में सर्कुलर जारी कर दिया है। शैक्षिक योग्यता की अनिवार्यता खत्म होने से मृतक आश्रित कोटे में नौकरी के लिए लंबित प्रकरणों का निपटारा शीघ्र हो पाएगा।
आवेदन पत्र के साथ जरूरी कागजात
रेलवे कर्मचारी के साथ संबंध का प्रमाण पत्र, मूल मृत्यु प्रमाण पत्र, लापता होने पर एफआईआर की प्रति व अंतिम रिपोर्ट, जाति प्रमाण पत्र, प्रोफॉर्मा पर परिवार के अन्य सदस्यों की देखभाल संबंधी घोषणा, चरित्र प्रमाण पत्र।