पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या ने पूरे देश के पत्रकारों की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल उठा दिया है। 55 वर्षीय बंगलूरु की पत्रकार को हमलावरों ने उनके घर में घुसकर गोली मारी है। गौरी महज एक पत्रकार नहीं थी बल्कि वो पत्रकारिता के साथ एक्टिविस्ट भी थीं. व्यवस्था के खिलाफ और नेक्सलाइट के समर्थन में वो बेबाक बोला और लिखा करती थीं।
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गौरी लंकेश एक पत्रकार परिवार से ताल्लुक रखती थीं उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत 1980 में की थी। उनके पिता पी लंकेश भी पत्रकार थे और भाई इंद्रजीत भी पत्रकार है। गौरी ने अपना करियर टाइम्स ऑफ इंडिया से शुरु किया था। उसके बाद लंकेश ने कई पब्लिकेशन में काम किया।
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