आपातकाल के 50 साल पूरे होने को लेकर भाजपा देशभर में संविधान हत्या दिवस मना रही है। राष्ट्रीय स्व्यंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना में किए गए बदलावों को निरस्त करने के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी से माफी मांगने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद और पंथनिरपेक्ष शब्द आपातकाल के दौरान ही जोड़े गए थे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि देश के संविधान की प्रस्तावना से समाजवाद और पंथनिरपेक्ष शब्दों को हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, कांग्रेस को 50 साल पहले इंदिरा गांधी सरकार की ओर से लगाए गए आपातकाल के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 1975 में कांग्रेस की सरकार ने समाजवाद और पंथनिरपेक्ष शब्दों को आपातकाल के दौरान ही जोड़ा था।
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आपातकाल थोपने वाले आज संविधान जेब में लेकर घूम रहे...
राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम में होसबाले ने कहा, आपातकाल थोपने वाले लोग आज संविधान जेब में लेकर घूम रहे हैं। इसके लिए उन्होंने आज तक देश के लोगों से माफी नहीं मांगी। इन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। आपातकाल के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक लाख लोगों को जेल में डाल दिया गया था।
न्यायपालिका को पंगु बना दिया गया, लेकिन कांग्रेस ने माफी नहीं मांगी
उन्होंने कहा, आपातकाल के दौरान 60 लाख लोगों की जबरन नसबंदी कर दी गई थी और 250 पत्रकारों को जेल में डाला गया था। इतना ही नहीं, न्यायपालिका को पंगु बना दिया गया लेकिन माफी नहीं मांगी। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि गलती आपके पूर्वजों ने की थी, इसके लिए आपको देश से माफी मांगनी चाहिए।
समाजवाद और पंथनिरपेक्ष शब्द आंबेडकर के संविधान की प्रस्तावना में नहीं थे
होसबोले ने कहा कि आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद और पंथनिरपेक्ष शब्दों को जोड़ा गया। इन दोनों शब्दों को रहना चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने जो संविधान बनाया, उनकी प्रस्तावना में ये दोनों शब्द नहीं थे।