मालदीव में राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने सोमवार देर शाम 15 दिन के आपातकाल की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही वहां के पूर्व राष्ट्रपति मामून अब्दुल गयूम और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अब्दुल्ला सईद, जज अली हमीद, ज्यूडिशियल एडमिनिस्ट्रेटर हसन सईद को गिरफ्तार कर लिया गया।
भारत ने मालदीव में इस तरह के हालात पर गहरी चिंताई जताई है और अपने नागरिकों को वहां न जाने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि मालदीव में कानून-व्यवस्था की स्थिति संतोषजनक नहीं है, इसलिए भारतीय नागरिक वहां जाने से परहेज करें।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन पूर्व राष्ट्रपति मामून अब्दुल गयूम के सौतेले भाई हैं। मामून पिछले कुछ समय से विपक्ष के साथ मिलकर अपने सौतेले भाई राष्ट्रपति यामीन को सत्ता से हटाने की मांग कर रहे थे। उन्हें जनसमर्थन भी मिल रहा था, लेकिन अपनी सत्ता के रास्ते में रोड़ा बन रहे मामून अब्दुल गयूम को उन्होंने सोमवार रात में ही गिरफ्तार कर लिया।
इससे पहले मालदीव में प्रजातंत्र पर मंडरा रहे खतरे के बीच वहां के उच्चतम न्यायालय ने भारत से सहयोग मांगा था। मालदीव की विपक्षी पार्टी ने भी भारत से अपने देश के अंदरूनी मामले में हस्तक्षेप करते हुए वहां के प्रजातंत्र को बचाने की गुहार लगाई थी। इसके लिए उन्होंने भारत, अमेरिका, श्रीलंका, यूरोपीय देशों से हस्तक्षेप की अपील की थी।
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मामून अब्दुल गयूम को भारत का हितैषी माना जाता है। वहां लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। इस बीच मालदीव की सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने का आदेश दे दिया था। लेकिन मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने राजनीतिक कैदियों और पूर्व राष्ट्रपति को रिहा करने में अपनी असमर्थता जताते हुए देश में आपातकाल की घोषणा कर दी।
भारत की नजर
भारत की नजर
मालदीव भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा के लिहाज से भी भारत के लिए मालदीव काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए भारत वहां के हर घटनाक्रम पर सीधी नजर रख रहा है। दरअसल, मालदीव का ताजा घटनाक्रम उसके लिए धर्म संकट की तरह है।
मालदीव में चीन ने भी अपना काफी प्रभाव बढ़ा लिया है। ऐसे स्थिति में वेट एंड वॉच की रणनीति पर चल रहा है। जब से लोकतात्रिक तरीके से चुनकर आए पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को सत्ता से बेदखल किया गया है, तब से भारत इस रणनीति पर चल रहा है। भारत नहीं चाहता कि मालदीव में चीन की भूमिका काफी बढ़े। इसलिए हर कदम काफी सोचकर उठा रहा है।
माना यह जा रहा है कि भारत की नजर मालदीव में विपक्ष के विरोध और जनता के रुख पर टिकी है। हालांकि राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन इसे भरसक दबाने की कोशिश करेंगे। लेकिन भारतीय रणनीतिकारों को उम्मीद है कि जल्द ही मालदीव में हालात बदलेंगे। राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को यकीन है कि ऐसी स्थिति में चीन उनकी मदद करेगा। इसलिए भारत हालात पर लगातार नजर रख रहा है और माना जा रहा है कि सही समय आने पर अपनी स्थिति को स्पष्ट करेगा।
अब्दुल्ला यामीन का अंतिम उपाय
भारतीय विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के पास वहां की सत्ता में बने रहने के लिए कोई और चारा नहीं बचा था। इसलिए वह आपातकाल लागू करके आखिरी हथियार इस्तेमाल कर रहे हैं। बताते हैं उच्चतम न्यायालय के आदेश पर अमल के बाद उनके पास दो ही रास्ते बचे थे।
पहला यह कि वह सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को रिहा कर दें। ऐसा होने की दशा में पूर्व राष्ट्रपति नशीद को सत्ता सौंपनी पड़ सकती थी। इसके बाद अब्दुल्ला यामीन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी तय मानी जा रही थी, लेकिन राष्ट्रपति यामीन ने खुद को सत्ता में बनाए रखने के लिए वहां आपातकाल लगा दिया है। इसे पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने इसे तख्ता पलट करार दिया है।
2013 से सत्ता में है यामीन
मालदीव की सेना हाई अलर्ट पर है
2013 से सत्ता में है यामीन
राष्ट्रपति यामीन 2013 से सत्ता में हैं। वह 2012 में मालदीव में पुलिस विद्रोह के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति नशीद को सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर किए जाने के बाद राष्ट्रपति बने थे। इसके बाद नशीद को 13 साल के कैद की सजा सुनाई गई थी लेकिन नशीद स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर ब्रिटेन चले गए थे।
ब्रिटेन में उन्हें राजनीतिक शरण मिल गई है। नशीद वहीं से राजनीतिक गतिविधियां चला रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल गयूम मालदीव में रहकर विपक्ष का सहयोग कर रहे थे। इस स्थिति में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी राजनीतिक दलों के कैदियों को रिहा करने का आदेश उन्हें काफी प्रतिकूल लग रहा था।
संवेदनशील रहा है भारत
मालदीव को लेकर भारत हमेशा संवेदनशील रहा है। 1988 में मामून अब्दुल गयूम वहां के राष्ट्रपति थे। तब उनका तख्ता पलट की कोशिश हुई थी। तत्कालीन राष्ट्रपति ने भारत से मदद मांगी थी और भारत ने मालदीव को विद्रोहियों से मुक्त कराने के लिए आपरेशन कैक्टस चलाया था।
तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अनुमति पर भारतीय वायुसेना ने मालदीव में भारतीय सैनिकों को उतारा और भारतीय सैनिकों ने पड़ोसी देश को अब्दुल्ला लुतूफी की तख्ता पलट जैसी विद्रोही कोशिश से मुक्त कराया।