कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सोमवार को कहा कि 1975 का आपातकाल एक गलती थी। यह 18 महीने चला था। लेकिन आज देश में जो अघोषित आपातकाल चल रहा है, उसकी कोई समय सीमा नहीं है।
राज्यसभा में संविधान की 75 साल की गौरवशाली यात्रा पर चर्चा में भाग लेते हुए सिंघवी ने 1975 के आपातकाल को एक खास सीमा के लिए संविधानिक विकृति करार दिया। उन्होंने कहा कि तब जो आपातकाल था, उसका एक तय समय था। लेकिन आज का आपातकाल चल रहा है, वह बिना किसी समय सीमा के चल रहा है।
सिंघवी ने कहा, आपातकाल के दौरान जो गलतियां हुईं, कांग्रेस ने उन्हें पहले भी स्वीकार किया है। अब 90 फीसदी भाषण 1950 के पहले संशोधन से शुरू होते हैं। लेकिन आज जो विकृतियां आ चुकी हैं, उनका क्या जवाब है? नेहरू ने गलती की थी, तो क्या हम भी वही करेंगे? यह तर्कसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा, जो आपातकाल 1975 में लागू हुआ था, वह एक गलती थी, लेकिन वह अंत में खत्म हो गई। हालांकि वर्तमान में देश में अघोषित आपातकाल चल रहा है, उसकी कोई समय सीमा नहीं है। इसे रोकने के लिए संविधान में कोई प्रावधान नहीं है, जिससे इसे रोका जा सके।
कांग्रेस नेता ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, हमारी संप्रभुता का पवित्र ग्रंथ संविधान खतरे में है। लोकतंत्र के स्तंभ हिल रहे हैं और तानाशाही सत्ता के मंदिरों में प्रवेश कर रही है। धर्मनिरपेक्षता की पवित्रता को नष्ट किया जा रहा है और संघवाद को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने आगे कहा, हम एक ऐसे दौर को देख रहे है, जहां संस्थाएं निष्क्रिय हो रही हैं। असहमति को दबाया जा रहा है और सच को छिपाया जा रहा है। लोकतंत्र के रक्षक अब इसके भक्षक बन गए हैं। आजादी को बचाने वाले अब इसके शिकार हैं।
सिंघवी ने कहा, (महात्मा) गांधी, (जवाहर लाल) नेहरू और पटेल ने जो सही किया,उसकी वजह से ही आज भी भारत का लोकतंत्र मजबूत है। जबकि अन्य देशों में यह कमजोर हो गया है। उन्होंने मौजूदा सरकार पर धर्मनिरपेक्षता और संघवाद के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया।
उन्होंने बुलडोजर से घरों को तोड़े जाने का हवाला देते हुए कहा कि 95 कार्रवाईयां एक खास समुदाय के खिलाफ की गईं। यह बुलडोजर राजनीति है और केंद्र सरकार ने इसे इतना बढ़ावा दिया है कि अब मुख्यमंत्री एक-दूसरे प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
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