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एलन मस्क की बौखलाहट: भारत में स्टारलिंक को लेकर अनर्गल टिप्पणी कर रहे अमेरिकी धनकुबेर, अंबानी पर भी बयानबाजी

Sun, 11 Oct 2026 11:39 AM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में अभी स्टारलिंक की एंट्री को हरी झंडी नहीं मिलने से बौखलाए अमेरिकी धनकुबेर एलन मस्क लगातार बयान दे रहे हैं। वे भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी पर भी टिप्पणी कर रहे हैं। उनके बयानों पर अभिनेता कमल हासन ने कहा कि भारत की नीतियां किसी अरबपति के दबाव में नहीं, बल्कि देश के हितों के आधार पर तय होनी चाहिए। कुनाल कपूर ने भी विदेशी टेक उद्योगपतियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
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स्टारलिंक विवाद - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत को लेकर बहस तेज हो गई है। मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि प्रभावशाली कारोबारी हित स्टारलिंक की भारत में एंट्री के रास्ते में बाधा बन रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इस तरह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी कंपनियों के लिए नियामकीय प्रक्रिया निष्पक्ष और समान है। मस्क की अनर्गल बयानबाजी का अंदाजा इसी बात से लगता है कि उन्होंने इंटरनेट पर अंबानी का समर्थन करने वाले लोगों को भी निशाने पर लिया है।

बड़बोले धनकुबेर की बयानबाजी

बकौल मस्क, 'अंबानी के इंटरनेट समर्थकों की फौज के बेतुके तर्क समझ से परे हैं। एक तरफ तो वे कहते हैं कि स्टारलिंक भारत में अंबानी के लगभग एकाधिकार द्वारा दी जा रही अविश्वसनीय रूप से कम कीमतों का मुकाबला नहीं कर सकता, और फिर उसी क्षण वे दावा करते हैं कि स्टारलिंक एक बहुत मजबूत प्रतिस्पर्धी होगा! यह सरासर पाखंड है।'

क्या कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है?

मस्क का तर्क है कि भारतीय बाजार में स्टारलिंक जैसी नई सेवा आने से ग्राहकों को इंटरनेट के अधिक विकल्प मिलेंगे। उनका कहना है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने से मौजूदा कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है, लेकिन इससे उनका कारोबार खत्म नहीं हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्टारलिंक की सेवाएं महंगी होंगी, तो ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनी को अपनी कीमतें किफायती रखनी होंगी। 

कमल हासन ने एलन मस्क को दिया जवाब

स्टारलिंक विवाद के बीच अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने मस्क के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी देश की नीतियां कोई अरबपति तय नहीं कर सकता, चाहे वह भारतीय हो या अमेरिकी। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और नीतिगत स्वतंत्रता पर जोर दिया।

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हासन ने कहा कि भारत को सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में भारतीय और विदेशी, दोनों तरह की कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेवाओं की कीमत आम लोगों की पहुंच में होनी चाहिए, खासकर उन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी चुनौती बनी हुई है।

उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत के दूरसंचार नेटवर्क और स्पेक्ट्रम केवल व्यावसायिक संसाधन नहीं, बल्कि रणनीतिक संपत्ति हैं। उनके मुताबिक, देश की सुरक्षा से जुड़े मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता। 

कुनाल कपूर ने भी उठाए सवाल

अभिनेता कुनाल कपूर ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पश्चिमी देशों के बड़े टेक उद्योगपतियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे एक ऐसी मानसिकता से जोड़ा, जिसमें विदेशी कंपनियां किसी देश में अपनी तकनीक को प्रगति का समाधान बताकर पेश करती हैं और विरोध होने पर वहां की व्यवस्था पर सवाल उठाने लगती हैं।

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कपूर ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी देश की नीतियों और संस्थाओं को लेकर असहमति होने का अर्थ यह नहीं है कि बाहरी कारोबारी खुद को उस देश का उद्धारकर्ता समझने लगें। उनकी टिप्पणी को स्टारलिंक की भारत में एंट्री को लेकर जारी बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है। 

भारत सरकार ने स्टारलिंक को लेकर क्या कहा?

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। उन्होंने बताया कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए रिलायंस जियो, यूटेलसैट वनवेब और स्टारलिंक को लाइसेंस दिए गए हैं। इसके अलावा, अमेजन की सैटेलाइट इंटरनेट परियोजना भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ सकती है।

मंत्री के मुताबिक, लाइसेंस मिलने के बाद भी कंपनियों को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले आवश्यक सुरक्षा मानकों और अन्य नियामकीय शर्तों को पूरा करना होगा। सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमत और शुल्क व्यवस्था को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। 

स्टारलिंक की एंट्री से आम ग्राहकों को क्या फायदा हो सकता है?

स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या फाइबर ब्रॉडबैंड पहुंचाना कठिन है। इससे दूरदराज के गांवों, छोटे कारोबारों और इंटरनेट की सीमित सुविधा वाले क्षेत्रों को लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, इसका वास्तविक फायदा सेवा की कीमत, उपकरणों की लागत, नेटवर्क की गुणवत्ता और नियामकीय मंजूरी पर निर्भर करेगा। भारत जैसे बड़े और विविध आय वाले देश में केवल बेहतर तकनीक पर्याप्त नहीं होगी; इंटरनेट का किफायती होना भी उतना ही जरूरी है।

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