भाजपा उत्तराखंड, त्रिपुरा की तरह दूसरे राज्यों में भी चुनाव दर चुनाव नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार करने का सिलसिला जारी रखेगी। कर्नाटक में बेहद प्रभावी लिंगायत समुदाय को साधे रखने के लिए पार्टी की योजना सीएम बसवराज बोम्मई पर भरोसा कायम रखते हुए उन्हें और मजबूती देने की है।
इस राज्य में सत्ता बरकरार रखने के लिए पार्टी की योजना प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के कद्दावर नेताओं के खिलाफ कद्दावर उम्मीदवार उतारने की भी है। गौरतलब है कि भाजपा बीते कुछ सालों से राज्यों में पुरानी पीढ़ी की जगह नई पीढ़ी को मौका दे कर नया नेतृत्व तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। इस क्रम में उत्तराखंड में सभी पुराने नेताओं को दरकिनार कर चरणबद्ध तरीके से नेतृत्व में दो बार बदलाव किया।
हिमाचल प्रदेश में भी पुरानी पीढ़ी के इतर जयराम ठाकुर, झारखंड में रघुवर दास, महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस को मौका दिया था। बिहार में सत्ता में वापसी के बाद पुराने चेहरों की जगह नए चेहरों पर भरोसा जताया था। राज्य में अध्यक्ष, विधानसभा और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के लिए भी पार्टी ने नए चेहरे को मौका दिया है।
भले ही कर्नाटक में पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा पार्टी के पोस्टर ब्यॉय और पीएम मोदी मुख्य चेहरा हैं। लेकिन, येदियुरप्पा की जगह लिंगायत समुदाय से ही सीएम बनाए गए बसवराज की पूछ कम नहीं हुई है। चूंकि येदियुरप्पा सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुके हैं। ऐसे में लिंगायत समुदाय को साधे रखने के लिए पार्टी को येदियुरप्पा की कद का ही इस समुदाय से कोई नेता चाहिए। इसके लिए पार्टी को इसी समुदाय के नेता का कद बढ़ाना पड़ेगा।
बोम्मई पर कायम रखेगी भरोसा
सिद्धारमैया के सामने येदियुरप्पा के बेटे को उतारने की तैयारी : कर्नाटक में पार्टी ने कांग्रेस के कद्दावर नेताओं को उन्हीं की सीट पर घेरने की रणनीति बनाई है। इसके तहत एक दर्जन बड़े नेताओं और उनकी सीटों का आकलन किया गया है। मसलन वरुणा सीट पर पार्टी की योजना सिद्धारमैया के खिलाफ पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के पुत्र बीवाई विजयेंद्र को उतारने की है।
जारी रहेगी सख्ती : पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक नई पीढ़ी को उभारने के प्रयोग कई राज्यों में सफल नहीं हुए हैं, बावजूद इसके पार्टी अपनी इस नीति पर काम करती होगी। नई पीढ़ी के नेताओं की कुछ कमजोरियों के बावजूद उन्हें तराशने का काम जारी रहेगा। कुछ राज्यों में विकल्प की समस्या है, बावजूद इसके ऐसे राज्यों में सकारात्मक परिणाम आने पर चुनाव के बाद नई पीढ़ी को मौका दिया जाएगा। फिलहाल पार्टी की निगाहें इस मामले में राजस्थान और छत्तीसगढ़ पर है।