तमाम अटकलों को विराम देते हुए कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके 2019 के लोकसभा चुनावों में किसके साथ काम करेंगे, उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) के साथ हाथ मिला लिया है। जद(यू) राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के महत्वपूर्ण सहयोगियों में शुमार है।
ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि उनके और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच मामला सुलझा गया है। बीते दिनों बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से उनकी मुलाकात की बात सामने आई थी। इसलिए ऐसी उम्मीद लगाई जा रही थी कि वे भाजपा के लिए काम करेंगे, लेकिन मामला कुछ और ही निकला। जद(यू) के महासचिव के सी त्यागी ने अमर उजाला संवाददाता से इस बात की पुष्टि की है कि प्रशांत किशोर पहले ही जद(यू) में शामिल हो चुके हैं और पार्टी के लिए काम करना शुरू कर चुके हैं।
त्यागी ने बताया कि प्रशांत किशोर लोकसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति और मास्टरप्लान तैयार करेंगे। साथ ही प्रशांत गठबंधन के साथी दलों के साथ सामने आ रही दिक्कतों को भी दूर करेंगे।
जद(यू), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), भाजपा, कांग्रेस और तेलुगू देशभ पार्टी जैसे विभिन्न राजनीतिक पार्टियां चाहती थीं कि आगामी लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर उनके लिए काम करें। लेकिन अब वह जद(यू) के लिए काम करेंगे। एक राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में, पीके की पहली राजनीतिक सफलता 2012 में थी जब उन्होंने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार निर्वाचित होने में मदद की थी। हालांकि, वे लोगों की नजर में तब चढ़ गए जब उनके द्वारा संकल्पना किए गए चुनावी अभियान समूह, सिटिजन फॉन एकाउंटेबल गर्वनेंस (सीएजी) ने 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल करने में मदद की।
गौरतलब है कि प्रशांत किशोर ने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कड़ी मशक्कत के बाद महागठबंधन की रणनीति तैयार की थी और उसे बिहार की सत्ता दिलाई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए रणनीति तैयार करने वाले प्रशांत किशोर ने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी लालू यादव और नीतीश को एक साथ लाए और महागठबंधन की चुनावी रणनीतियों को बहुत ही बारीकी से तैयार किया था।