पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत अमर्त्य सेन के नाम में तकनीकी गड़बड़ी सामने आई। चुनाव अधिकारी उनके बोलपुर स्थित घर पहुंचे और जरूरी दस्तावेज जुटाए। आइए जानते हैं, इस मामले पर चुनाव आयोग ने क्या कहा।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेनका नाम सामने आने से मामला चर्चा में आ गया है। शुक्रवार को चुनाव आयोग के अधिकारी बीरभूम जिले के बोलपुर स्थित उनके पैतृक घर प्रतीची पहुंचे और जरूरी दस्तावेज जुटाए। यह कार्रवाई एसआईआर प्रक्रिया के तहत की गई, जिसे आयोग नियमित प्रक्रिया बता रहा है।
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चुनाव अधिकारियों ने अमर्त्य सेन के आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र नंबर, उनकी मां अमिता सेन का मृत्यु प्रमाण पत्र और वह पत्र लिया, जिसमें सेन ने अपने चचेरे भाई शांतभानु सेन को सुनवाई में उनकी ओर से पेश होने की अनुमति दी है। सेन इस समय अमेरिका में हैं और हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र और दर्शन के प्रोफेसर हैं। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि अधिकारियों ने सभी जरूरी कागजात एकत्र किए हैं।
मतदाता फॉर्म में क्या गड़बड़ी मिली?
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, अमर्त्य सेन के एन्यूमरेशन फॉर्म में एक विसंगति पाई गई थी। फॉर्म में उनका नाम उनकी मां अमिता सेन से जोड़ा गया था, जबकि दोनों की उम्र में 15 साल से कम का अंतर दिख रहा था। इसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण ईआरओ नेट पोर्टल पर मामला फ्लैग हुआ और सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया।
अधिकारियों ने क्या सफाई दी?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा कि यह नोटिस अन्य समान मामलों की तरह ही जारी किया गया। चूंकि अमर्त्य सेन की उम्र 85 वर्ष से अधिक है, इसलिए ईआरओ, एईआरओ और बीएलओ ने स्वयं उनके घर जाकर औपचारिकताएं पूरी कीं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रक्रिया नियमों के तहत और नियमित ढंग से अपनाई गई।
2026 की एसआईआर ड्राफ्ट सूची में उनका नाम प्रवासी भारतीय श्रेणी में दर्ज है।
सूची में उनका नाम पार्ट 274, सीरियल नंबर 169 पर है।
एसआईआर प्रक्रिया के तहत अब दस्तावेजों की जांच की जाएगी और सुनवाई पूरी होने के बाद मतदाता सूची में अंतिम संशोधन किया जाएगा। चुनाव आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना है। वहीं, अमर्त्य सेन से जुड़े इस मामले ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि तकनीकी चूक कैसे इतनी बड़ी पहचान तक पहुंच गई।