थरूर ने साक्षात्कार में यह भी कहा कि कांग्रेस प्रमुख के रूप में राहुल गांधी लौटना चाहते हैं या नहीं, यह उनकी इच्छा पर निर्भर करता है। लेकिन यदि वह अपना पिछला रुख नहीं बदलते हैं तो ऐसे में पार्टी के लिए 'सक्रिय और पूर्णकालिक नेतृत्व' तलाशने की जरूरत है। ताकि पार्टी आगे बढ़ सके जैसा कि राष्ट्र कांग्रेस से अपेक्षा करता है।
विभाजनकारी नीतियों का विकल्प है कांग्रेस: थरूर
साक्षात्कार के दौरान थरूर ने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा की 'विभाजनकारी नीतियों' का कांग्रेस एक अपरिहार्य राष्ट्रीय विकल्प है। उन्होंने कहा कि हम जैसे कई लोगों के लिए तत्काल चिंता का विषय यह है कि ऐसा लगता है कि लोगों में यह धारणा बढ़ती जा रही है कि बतौर राजनीतिक निकाय हम डांवाडोल हैं।
थरूर ने कांग्रेस पार्टी को भाजपा का विकल्प बनाने की पीछे दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के ‘डांवाडोल’ होने की धारणा की वजह से स्वभाविक रूप से कुछ मतदाता अन्य राजनीतिक विकल्पों पर सोचने लगते हैं। इसका उदाहरण दिल्ली में देखा गया जहां मतदाता आप (आम आदमी पार्टी) के साथ चले गए और कुछ हद तक भाजपा के खेमे में भी चले गए। कांग्रेस शून्य रही।
नई शुरुआत करने की जरूरत
उन्होंने कहा कि यही वह स्थिति है जहां हमें लोगों की धारणा, मीडिया के रुख को तत्काल दूर करने की जरूरत है क्योंकि मीडिया बार-बार हमें मैदान से खारिज कर दे रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लेकिन ऐसा करने के लिए हमें वर्तमान नेतृत्व मुद्दा हल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें अंतरिम के बजाए दीर्घकालिक कांग्रेस अध्यक्ष और कार्य समिति की 'निर्वाचित सदस्यों' के साथ नई शुरुआत करने की जरूरत है।