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सीवीसी-सीबीआई की तरह चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में हो बदलाव : एसवाई कुरैशी

Tue, 21 May 2019 02:58 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
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एसवाई कुरैशी (फाइल फोटो)
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लोकसभा चुनाव के दौरान और एग्जिट पोल के बाद निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। खासतौर पर, आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले बड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई न होना और ईवीएम-वीवीपैट को लेकर अभी तक राजनीतिक दलों को संतुष्ट न कर पाना, इन्हीं मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग को घेरा जा रहा है। हाल ही में चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का वह पत्र, जिसमें उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ मिली आदर्श चुनाव आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतों की ठीक से जांच नहीं करने की बात कही, खासी चर्चा में रहा था। 

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कांग्रेस पार्टी ने तो चुनाव आयोग की भर्ती प्रक्रिया को ही बदलने की बात कह दी है। देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी कहते हैं कि सीवीसी और सीबीआई की तर्ज पर चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति होनी चाहिए। मंगलवार को अमर उजाला डॉट कॉम के साथ विशेष बातचीत करते हुए कुरैशी ने कहा, चुनाव आयोग का काम केवल चुनाव संपन्न कराना नहीं है। इसकी एक बड़ी जिम्मेदारी लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा का निर्वहन और लोगों के भरोसे को बनाए रखना है। 

हम यह नहीं कहते कि चुनाव आयोग ठीक से काम नहीं कर रहा है, लेकिन जब चारों ओर से किसी संस्था के विश्वास पर उंगलियां उठने लगे तो सोचना बनता है। विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग को लेकर लगातार कोई न कोई बयान जारी कर रही हैं। ऐसे में चुनाव आयोग का दायित्व बनता है कि वह राजनीतिक दलों और जनता को संतुष्ट करे। पिछले दिनों आदर्श चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में मोदी, शाह और दूसरे नेताओं को लेकर चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच जो पत्राचार हुआ है, वह सार्वजनिक है। 

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एक बात साफ है कि अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों के मन में अनेक सवाल खड़े हो रहे हैं। कुरैशी कहते हैं, यह केवल मेरी सोच नहीं है। इस बाबत मैं अपने कई पूर्ववर्ती सहयोगियों से भी बात कर चुका हैं। सभी की यह राय बन रही है कि चुनाव आयोग की भर्ती प्रक्रिया को बदल दिया जाए। जिस तरह से केंद्रीय सतर्कता आयोग और सीबीआई निदेशक की नियुक्ति की जाती है, वही प्रक्रिया चुनाव आयोग के लिए भी अपनाई जाए। चुनाव आयोग की नियुक्तियां भी एक कमेटी के जरिए हों। 

इस कमेटी में पीएम, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष का नेता शामिल हो। इसका फायदा यह होगा कि कम से कम विपक्षी दलों को यह शिकायत तो नहीं रहेगी कि चुनाव आयोग सरकार की कठपुतली है। वह दबाव में काम कर रहा है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने बिना किसी हिचक के यह बात कही कि हमें भी मौजूदा नियुक्ति प्रणाली का फायदा मिला था, लेकिन अब परिस्थितियां बदलती जा रही हैं। कोई एक दो पार्टी नहीं, बल्कि 21 दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर संदेह जता रहे हैं। 

कांग्रेस सत्ता में आई तो आयोग की भर्ती प्रक्रिया बदल जाएगी

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि अगर यूपीए-3 सत्ता में आता है तो पहला काम भारतीय निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता को वापस लाना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने निर्वाचन आयोग को पूरी तरह खत्म कर दिया है। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर जबरन कब्जा कर लिया गया है।  

लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा आदर्श चुनाव आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन किया गया। कांग्रेस पार्टी ने इस बाबत चुनाव आयोग को 11 शिकायत दी हैं, लेकिन किसी पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। इससे साबित होता है कि चुनाव आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है। 
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