वादे तो वादे होते हैं। झूठे हों या सच्चे, बुरे हों या अच्छे, लेकिन राजनीतिक दलों के लिए चुनाव जीतने के लिए ये फायदेमंद ही साबित होते हैं। तमाम राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने घोषणापत्रों में वादों की बरसात कर देते हैं। लेकिन अब इन दलों को सोच-समझकर अपने चुनावी घोषणापत्र तैयार करने होंगे।
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों की ऐसी घोषणाओं पर लगाम लगा दी है जो पूरी न की जा सकें। आयोग ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिए हैं कि घोषणा पत्र में ऐसा कोई वादा ना करें जो पूरा न किया जा सके।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने बताया कि चुनावी घोषणा-पत्र जारी होने के तीन दिन के भीतर उसकी तीन प्रति राज्यों में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपें। घोषणा पत्र की कॉपी का पहले मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा परीक्षण किया जाएगा, इसके बाद इसे केंद्रीय चुनाव आयोग भेजा जाएगा।
घोषणा पत्र में कोई ऐसा वादा नहीं करें जिसे पूरा नहीं किया जा सके। आयोग ने राजनीतिक दलों को अन्य प्रावधान भी किए हैं, जिसमें उन्हें अधिसूचना जारी होने के सात दिन के भीतर स्टार प्रचारकों की अनुमति के लिए आवेदन देना होगा। इसमें मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों एवं राज्य दलों के लिए स्टार प्रचारकों की संख्या 40 निर्धारित है।
अन्य दलों के लिए यह संख्या 20 निर्धारित की गई है। सत्ता की कुर्सी हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों के पास सबसे अच्छा अस्त्र होता है चुनावी घोषणाएं। चाहे एक रुपये किलो गेहूं-चावल देना हो, लाखों गरीब किसानों को भूमि और आवास देना हो या फिर छात्रों को मुफ्त लैपटॉप मोबाइल देने की घोषणा हो, इन तमाम घोषणाओं के दम पर राजनीतिक दल सत्ता के सिंहासन तक पहुंचते हैं।