चुनाव आयोग ने अशोक लवासा की असहमति वाली टिप्पणियों का खुलासा करने से मना किया है। एक आरटीआई एक्टिविस्ट को चुनाव आयोग ने यह कहकर लवासा के नोट जारी करने से इंकार कर दिया है कि इस तरह की जानकारी किसी व्यक्ति के जीवन और उसकी शारीरिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।
आरटीआई कार्यकर्ता विहार दुर्वे ने लवासा के असहमति जताने वाली टिप्पणियों की मांग की थी। ये वर्धा में एक अप्रैल, लातूर में नौ अप्रैल, पाटन और बाड़मेर में 21 अप्रैल और वाराणसी में 25 अप्रैल को हुई रैलियों में मोदी के भाषणों से संबंधित थे। दुर्वे ने इन भाषणों के संबंध में आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया और आयोग द्वारा दिए गए निर्णय की जानकारी भी मांगी थी। इस सूचना को भी अधिनियम की धारा 8 (1) (जी) का हवाला देते हुए देने से मना कर दिया गया था।
लवासा ने प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को उनके भाषणों के लिए आयोग द्वारा दी गई कई ‘क्लीन चिट’ पर कथित तौर पर असहमति व्यक्त की थी। लवासा ने अपनी असहमति वाली टिप्पणियों को चुनाव आयोग के आदेशों में दर्ज किए जाने की मांग की थी लेकिन ऐसा नहीं होने पर लवासा ने खुद को चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े मामलों से खुद को अलग कर लिया था।
आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन के लिए मोदी और शाह के खिलाफ की गई शिकायतों में चुनाव आयोग के 11 निर्णयों पर लवासा ने कथित तौर पर असहमति जताई थी। इन निर्णयों में प्रधानमंत्री मोदी और शाह को क्लीन चिट दी गई थी। 16 मई को लवासा ने यह कह कर एमसीसी की बैठक में भाग लेने से इंकार कर दिया था जब तक अल्पसंख्यक निर्णयों को फैसलों में शामिल नहीं किया जाता वह आदर्श आचार संहिता को लेकर होने वाली बैठकों में भाग नहीं लेगें।
अशोक लवासा के इस विरोध से हड़कंप मच गया था। चुनाव आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8 की उपधारा 1जी का हवाला देकर कहा है कि जो जानकारी किसी के जीवन और शारीरिक सुरक्षा को खतरे में डाल देगा वह कानून होते हुए भी सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील है। इसलिए चुनाव आयोग ने इस जानकारी को देने से इंकार किया है। लवासा ने पीएम नरेंद्र मोदी को दी गई 10 में से 5 क्लीन चिट का विरोध किया था।