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Election Commission: 'गलत सूचना का जवाब तथ्यों से दें', सोशल मीडिया संभाल रहे अधिकारियों को EC ने दिए निर्देश

Fri, 12 Sep 2025 10:24 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चुनाव आयोग ने राज्यों में सोशल मीडिया संभाल रहे अधिकारियों को निर्देश दिया कि गलत सूचना का जवाब तथ्यों से दिया जाए। दिल्ली में हुई कार्यशाला में मतदाता सूची संशोधन और पारदर्शिता पर जोर दिया गया। इस बीच, कार्यशाला के दौरान कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया आरोपों का भी जिक्र हुआ।

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब- निर्वाचन आयोग
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विस्तार
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चुनाव आयोग (ईसी) ने शुक्रवार को राज्यों में सोशल मीडिया संभाल रहे अपने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि बढ़ती गलत सूचनाओं का जवाब केवल तथ्यों के आधार पर दिया जाए। आयोग ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर किसी भी तरह का संदेह पैदा करने वाली सूचनाओं को तुरंत खारिज किया जाए और जनता तक सटीक जानकारी पहुंचाई जाए।

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दिल्ली में आयोजित एक वर्कशॉप में राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के मीडिया और सोशल मीडिया प्रभारी अधिकारियों को संबोधित करते हुए ईसी ने कहा कि देश में चुनाव पूरी तरह संविधान के तहत और पारदर्शी तरीके से कराए जाते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक जानकारी फैलने पर तुरंत उसका तथ्यात्मक खंडन होना चाहिए।

संचार तंत्र को और मजबूत करने पर जोर
वर्कशॉप में बताया गया कि सीईओ कार्यालयों को मीडिया और अन्य हितधारकों तक समय पर सही जानकारी पहुंचाने की क्षमता बढ़ानी होगी। इसके लिए संवाद तंत्र को और मजबूत करने, त्वरित सूचना प्रसार और सोशल मीडिया पर सक्रिय उपस्थिति की जरूरत है। आयोग ने कहा कि जानकारी का प्रवाह जितना तेज और सही होगा, गलत सूचना उतनी ही कमजोर पड़ेगी।
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इस कार्यशाला में विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेसिव रिवीजन यानि एसआईआर) से जुड़े सत्र भी आयोजित किए गए। इसमें बताया गया कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान भी कई बार गलत सूचनाएं फैलती हैं। इसलिए अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मीडिया और जनता तक सही तथ्यों के साथ पारदर्शी प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।

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विशेषज्ञ सत्र में तकनीक पर फोकस
वर्कशॉप में एक विशेष विशेषज्ञ सत्र रखा गया जिसमें गलत सूचनाओं को पहचानने और उनसे निपटने की तकनीक व रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों को बताया गया कि डिजिटल युग में फर्जी सूचनाएं तेजी से फैलती हैं और ऐसे में तथ्य, डेटा और पारदर्शिता ही सबसे प्रभावी हथियार हैं।

इस बीच, कार्यशाला के दौरान कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया आरोपों का भी जिक्र हुआ। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव और कर्नाटक की बंगलूरू सेंट्रल लोकसभा सीट के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में “वोट चोरी” का आरोप लगाया था। उन्होंने 17 अगस्त को बिहार के सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली थी जो एक सितंबर को पटना में खत्म हुई। उनका आरोप है कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के अधिकारों पर हमला हुआ।

चुनाव आयोग की सख्त प्रतिक्रिया
राहुल गांधी के आरोपों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 17 अगस्त को ही उन्हें सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अपने आरोपों को शपथपत्र के जरिए साबित करें, अन्यथा ये दावे निराधार और अमान्य माने जाएंगे। कुमार ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप गंभीर है और यदि राहुल गांधी इसे साबित नहीं कर पाते तो उन्हें माफी मांगनी होगी।
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ईसी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का चुनाव तंत्र दुनिया में सबसे पारदर्शी और मजबूत है। चुनावी प्रक्रिया को लेकर अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर नजर रखी जाएगी और हर गलत सूचना का जवाब तथ्यों से दिया जाएगा। आयोग का मानना है कि केवल तथ्यों पर आधारित प्रतिक्रिया से ही लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनी रहेगी।


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