नए मतदाताओं के पंजीकरण को लेकर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वोटर लिस्ट के किसी विशेष पुनरीक्षण का इंतजार करना जरूरी नहीं है। आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों का नाम अभी मतदाता सूची में नहीं है या जो तय तारीख पर 18 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं, वे निर्धारित नियमों के तहत अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा सकते हैं।
चार तारीखों पर 18 साल पूरा करने वालों को मौका
चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता बनने के लिए अब साल में चार योग्यता तिथियां यानी 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्तूबर हैं। इन तारीखों में से किसी पर 18 साल की उम्र पूरी करने वाला व्यक्ति मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है।
कानून के मुताबिक आवेदक का भारतीय नागरिक होना, संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवासी होना और मतदाता के तौर पर पंजीकरण के लिए अयोग्य न होना जरूरी है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 19 में 18 वर्ष की आयु और सामान्य निवास को पंजीकरण की प्रमुख शर्त बताया गया है।
वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण का इंतजार जरूरी नहीं
अधिकारियों ने कहा कि नियमित रूप से मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत पात्र व्यक्ति बिना किसी विशेष पुनरीक्षण का इंतजार किए नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बीच आया है जिनमें वार्षिक विशेष सारांश संशोधन (एसएसआर) में देरी को लेकर सवाल उठाए गए थे। चिंता जताई गई थी कि इससे नए पात्र युवाओं के नाम मतदाता सूची में शामिल होने में देरी हो सकती है।
SSR और SIR को लेकर भी आयोग की सफाई
अधिकारियों ने बताया कि विशेष सारांश संशोधन (एसएसआर) और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) दोनों जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत किए जाते हैं। आयोग के अनुसार, दोनों प्रक्रियाएं वैकल्पिक हैं और कानून में यह जरूरी नहीं है कि दोनों को एक साथ कराया जाए।
आयोग की मौजूदा मतदाता सेवाओं में नए मतदाता के पंजीकरण, आवेदन की स्थिति देखने और मतदाता सूची में विवरण अपडेट करने की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
युवाओं को मतदाता प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर
चुनाव आयोग ने 18 से 29 वर्ष की उम्र के युवाओं को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने पर भी जोर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, युवा मतदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 1 जनवरी 2025 तक देश में 18-29 आयु वर्ग के करीब 21.7 करोड़ मतदाता थे। आयोग का कहना है कि युवाओं की चुनावी भागीदारी बढ़ना मतदाता पंजीकरण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।