शुभेंदु अधिकारी, नेता प्रतिपक्ष, पश्चिम बंगाल
- फोटो : एएनआई (फाइल)
जीटीए के भविष्य पर चर्चा तेज
अब जब पहाड़ी क्षेत्रों की सभी सीटें भाजपा के पास हैं, तो गोरखा प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह संस्था ममता बनर्जी सरकार के समर्थन से चलती थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव के दौरान 'संविधान के दायरे में पहाड़ों की समस्याओं का स्थायी समाधान' देने का वादा किया था। इसे भाजपा सांसद राजू बिस्टा ने जीटीए खत्म करने के संकेत के रूप में देखा। टीएमसी के सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के प्रमुख अनित थापा ने हार का कारण राज्य में हुए 'सरकार के खिलाफ वोट' को बताया। अनित थापा जीटीए के प्रमुख भी हैं।
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एक स्थानीय मतदाता ने कहा कि अब लोग यह देखना चाहते हैं कि भाजपा पहाड़ों के लिए क्या स्थायी समाधान लाती है, क्योंकि अब राज्य और केंद्र दोनों जगह उसकी सरकार है। सिलीगुड़ी नगर निगम के महापौर और टीएमसी के हारे हुए उम्मीदवार गौतम देव ने कहा कि मतदाता सूची में नाम हटने (एसआईआर) और प्रशासन से जुड़े मुद्दों के कारण पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा।
कुड़मी-महतो समुदाय को साधा
मध्य बंगाल के जंगल महल क्षेत्र (पुरुलिया, बांकुरा और झारग्राम) में भी टीएमसी का पूरी तरह सफाया हो गया। पुरुलिया की 9, बांकुरा की 12 और झारग्राम की 4 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की। विशेषज्ञों का कहना है कि कुड़मी-महतो समुदाय के वोट इस बार भाजपा की ओर चले गए, क्योंकि अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने में देरी से उनमें नाराजगी थी। इससे टीएमसी को नुकसान हुआ। भाजपा ने इस समुदाय से जुड़े नेताओं को उम्मीदवार बनाया, जिससे उसे फायदा मिला।इसके अलावा, आदिवासी वोटों का बंटवारा, रोजगार की कमी के कारण पलायन, टीएमसी में अंदरूनी गुटबाजी और उम्मीदवारों के चयन को लेकर असंतोष भी पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण बने।
पश्चिम बर्धमान जिले की सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा
पश्चिम बर्धमान जिले में भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी नौ सीटों पर कब्जा कर लिया। उसने 2021 में टीएमसी द्वारा जीती गई 6 सीटें छीन लीं और बाकी 3 सीटें भी बरकरार रखीं। स्थानीय टीएमसी कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुछ नेताओं के अहंकार और जनता की सेवा की बजाय निजी लाभ पर ध्यान देने से पार्टी की छवि खराब हुई। टीएमसी के पूर्व नेता जितेंद्र तिवारी ने कहा कि जनता ने यह जनादेश 'बंगाल में फिर से उद्योग लाने, रोजगार बढ़ाने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने' के लिए दिया है। जितेंद्र तिवारी अब भाजपा में हैं और इस बार चुनाव जीत गए हैं।