चुनाव से पहले उम्मीदवारों का एलान
- फोटो : AMAR UJALA
साल के अंत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी ने गुरुवार को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के लिए कुल 60 उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी है।
भाजपा का यह कदम पार्टी की पुरानी चुनावी रणनीति के लिहाज से काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है। अमूमन पार्टी चुनाव तारीखों की घोषणा के बाद ही प्रत्याशियों के नाम का एलान करती रही है। कहा जा रहा है कि पार्टी के इस कदम से उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के लिए ज्यादा समय मिलेगा। इससे वो जनता तक अपनी बातें बेहतर तरीके से पहुंचा सकेंगे और पार्टी को इसका फायदा होगा। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर भाजपा से पहले किन पार्टियों ने चुनाव घोषित होने से पहले प्रत्याशी घोषित किए? ऐसा करने वाली पार्टियों का चुनाव में प्रदर्शन क्या रहा? आइये समझते हैं...
भाजपा ने 60 नामों की सूची जारी की।
- फोटो : AMAR UJALA
पहले जानते हैं अभी क्या हुआ है?
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के कुल 60 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी गई। इनमें मध्य प्रदेश से 39 और छत्तीसगढ़ से 21 प्रत्याशियों के नाम का एलान किया गया। दोनों राज्यों की इन साठ सीटों में से 59 पर भाजपा को 2018 में हार मिली थी। वहीं, झाबुआ सीट पर 2018 में पार्टी को जीत जरूर मिली थी। लेकिन, बाद में हुए उपचुनाव में यहां से कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया विधायक बने थे।
इसी तरह छत्तीसगढ़ की सभी 21 सीटों पर इस वक्त कांग्रेस का कब्जा है। 2018 के चुनाव में इन 21 में से 20 पर कांग्रेस और एक पर जनता कांग्रेस को जीत मिली थी। राज्य की मरवाही सीट से पूर्व मुख्यमंत्री और जनता कांग्रेस के सुप्रीमो रहे अजीत जोगी जीते थे। जोगी के निधन के बाद हुए उपचुनाव में यहां कांग्रेस को जीत मिली।
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
क्या पहले भी पार्टियां चुनाव तारीखों के एलान से पहले प्रत्याशी घोषित करती रही हैं?
चुनाव घोषित होने से पूर्व उम्मीदवारों की सूची जारी करने के कई उदाहरण मिलते हैं। अलग-अलग पार्टी अलग-अलग समय पर इस रणनीति को अपनाती रही है। दिलचस्प ये है कि भाजपा ने इन राज्यों में उम्मीदवारों का एलान करने वाली पहली पार्टी नहीं है।
भाजपा से पहले मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी छत्तीसगढ़ में उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर चुकी है। बसपा ने आठ अगस्त को ही राज्य की नौ विधानसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों का एलान किया था। 2018 के चुनाव में बसपा राज्य में दो सीटें जीतने में सफल रही थी। पार्टी को करीब चार फीसदी वोट भी मिले थे।
इसी तरह मध्य प्रदेश में भी बसपा 10 अगस्त को ही सात उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर चुकी है। इतना ही नहीं मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी पहले पार्टी ने राजस्थान के उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी थी। पार्टी ने 28 जुलाई को तीन सीटों के लिए उम्मीदवारों का एलान कर दिया था। तीनों सीटें पूर्वी राजस्थान के धौलपुर और भरतपुर जिलों की हैं और इनमें से दो सीटें 2018 में बसपा उम्मीदवारों ने जीती थीं। हालांकि, बसपा के सभी जीते हुए छह विधायक बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
बसपा सुप्रीमो मायावती।
- फोटो : amar ujala
क्या बसपा ने भी भाजपा की तरह पहली बार इस रणनीति को अपनाया है?
बसपा की ये काफी पुरानी रणनीति रही है। पिछले कई चुनावों से पार्टी चुनावी राज्य में चुनाव तारीखों की घोषणा से काफी पहले उम्मीदवारों का एलान कर देती है। यहां तक संबंधित उम्मीदवार महीनों पहले चुनाव प्रचार में लग जाते हैं।
इन राज्यों में उत्तर प्रदेश भी शामिल है। 2007 में जब बसपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई थी तब भी पार्टी ने अधिकतर उम्मीदवारों को चुनाव की घोषणा से करीब एक साल पहले ही बता दिया था कि आपको चुनाव लड़ना है। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भी पार्टी ने अधिकांश सीटों पर इसी रणनीति पर काम किया था। हालांकि, औपचारिक सूची बाद में जारी की गई।
Karnatala Election- JDS leader Kumaraswamy With father HD Devegowda
- फोटो : Agency (File Photo)
तो क्या सिर्फ बसपा में ऐसा होता रहा है?
ऐसा नहीं है। हाल के वर्षों में कई पार्टियां इस रणनीति पर काम करती रही हैं। सबसे ताजा उदाहरण हाल में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में ही देखने को मिलता है। राज्य के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और जेडीएस ने यही रणनीति अपनाई थी।
जेडीएस ने कर्नाटक विधनसभा चुनाव के एलान से करीब साढ़े तीन महीने पहले अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी थी। पार्टी ने 19 दिसंबर 2022 को 93 प्रत्याशियों वाली पहली सूची जारी की। राज्य में 29 मार्च को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हुई। वहीं, 13 मई नतीजे आए थे। चुनाव नतीजों में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस तीसरे नंबर पर रही थी। 224 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी को पहले से भी कम महज 19 सीटें ही मिल सकीं और उसकी रणनीति का कुछ खास असर भी नहीं हुआ।
dk shivakumar siddaramaiah
- फोटो : सोशल मीडिया
कांग्रेस का क्या हुआ?
इसी चुनाव के लिए कांग्रेस ने भी चुनाव तारीखों के एलान पहले उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर की दी थी। कांग्रेस ने राज्य के विधानसभा चुनाव के लिए 25 मार्च को 124 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। चार दिन बाद चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीखों का एलान किया। जब राज्य में नतीजे आए तो पार्टी को जबरदस्त जीत मिली और इसने 135 सीटें जीतकर अकेले दमपर सरकार बनाई।
रैली को संबोधित करते सीएम केजरीवाल
- फोटो : अमर उजाला
और किसी पार्टी ने इस तरह उम्मीदवारों का एलान किया है?
बहुजन समाज पार्टी की तरह आम आदमी पार्टी भी कई राज्यों में इसी तर्ज पर उम्मीदवारों का एलान करती रही है। पिछले साल हुए गुजरात, हिमाचल, पंजाब और उत्तराखंड के चुनाव के दौरान भी पार्टी ने चुनाव तारीखों के एलान से काफी पहले उम्मीदवार घोषित करने शुरू कर दिए थे।
गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 से महीनों पहले आप ने दो अगस्त को कुल 182 में से 10 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। इस कदम के साथ AAP दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अपने उम्मीदवारों की सूची की घोषणा करने वाली गुजरात की पहली राजनीतिक पार्टी बन गई थी। चुनाव आयोग ने तीन नवंबर को गुजरात चुनाव की तारीखों की घोषणा की थी। चुनाव के एलान से पहले पार्टी उम्मीदवारों की आठ सूची जारी कर चुकी थी। इन सूचियों में कुल 108 उम्मीदवारों का एलान हो चुका था। हालांकि, चुनाव नतीजों में अरविंद केजरीवाल की पार्टी को पांच सीटें ही मिल सकी थीं।
इसी तरह फरवरी 2022 में पंजाब विधानसभा के चुनाव होने थे। पार्टी ने चार महीने पहले ही उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी थी। 12 नवंबर 2021 को आप ने पहली सूची में 10 उम्मीदारों के नाम घोषित किए थे। चुनाव आयोग ने आठ जनवरी 2022 को पंजाब चुनाव की तारीखों की घोषणा की थी। सात जनवरी तक आप राज्य में कुल आठ सूचियां जारी कर चुकी थी। इन आठ सूचियों में 104 उम्मीदवारों का एलान हो चुका था। महज 13 सीटें ऐसी थीं जहां उम्मीदवारों के नाम का एलान चुनाव की घोषणा के बाद हुआ। जब राज्य में चुनाव नतीजे आए तो पार्टी ने कमाल कर दिया। आप ने दशकों से कांग्रेस या शिरोमणि अकाली दल के हाथों में रहे राज्य की सत्ता में कब्जा कर लिया। इस चुनाव में 117 में से 92 विधानसभा सीटों में आप को एकतरफा जीत मिली थी।