सोशल मीडिया एक्स पर रेलवे के पोस्ट में लिखा गया है कि, ट्रेन संख्या 15708 'आम्रपाली एक्सप्रेस' के जनरल कोच में यात्रा करते समय 70 वर्षीय यात्री को दिल का दौरा पड़ा। वहां तैनात टीटीई ने तुरंत सीपीआर देकर यात्री की जान बचाई। इसके बाद यात्री को छपरा रेलवे स्टेशन के अस्पताल में भेजा गया।
रेलवे मंत्रालय की तरफ से एक टिकट परीक्षक (टीटीई) की तरफ से कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने वाले 70 वर्षीय यात्री की सीपीआर से जान बचाने का एक वीडियो साझा किया गया है। इस वीडियो में, रेलवे ने टीटीई की 'जीवनरक्षक' के रूप में प्रशंसा की, क्योंकि उसने ट्रेन में निचली बर्थ पर लेटे एक बुजुर्ग व्यक्ति को बचा लिया था। इस वीडियो को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी अपने सोशल मीडिया एक्स पर शेयर किया है।
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टीटीई की तत्परता से मिला ‘जीवनदान’
सोशल मीडिया एक्स पर रेलवे के पोस्ट में लिखा गया है कि, ट्रेन संख्या 15708 'आम्रपाली एक्सप्रेस' के जनरल कोच में यात्रा करते समय 70 वर्षीय यात्री को दिल का दौरा पड़ा। वहां तैनात टीटीई ने तुरंत सीपीआर देकर यात्री की जान बचाई। इसके बाद यात्री को छपरा रेलवे स्टेशन के अस्पताल में भेजा गया।
कुछ ही मिनट में बुजुर्ग को मिला आराम
रेलवे की तरफ से साझा किए गए एक मिनट के वीडियो में कई बार टीटीई बुजुर्ग के सीने को दबाता है और मुंह से सांस भी देता है। जानकारी के अनुसार करीब पांच की प्रक्रिया के बाद बुजुर्ग को राहत मिलती है। वीडियो में साफ सुना जा सकता है टीटीई बुजुर्ग से पूछता है कि वो कैसा महसूस कर रहा है, इस पर बुजुर्ग उसे जवाब भी देता है।
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क्या होती है सीपीआर?
सीपीआर एक तरह की जीवन रक्षक तकनीक है जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की सांस रुक जाती है या उसका दिल काम करना बंद कर देता है। ऐसा दिल का दौरा पड़ने, डूबने, दम घुटने या किसी हादसे की वजह से हो सकता है। इस दौरान सीने को एक समान तरीके से दबाने पर दिल को कृत्रिम रूप से पंप करने में मदद मिलती है और शरीर में खून का संचार बना रहता है। जबकि सांस देने से फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुंचती है जो खून के जरिए शरीर के बाकी हिस्सों तक जाती है।