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जानिए क्या होता है अल-नीनो प्रभाव, जिसके कारण इस साल सामान्य रहेगा भारतीय मानसून

Tue, 16 Apr 2019 04:19 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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देश में इस साल मानसून सामान्य के करीब रहेगा। भारत मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने सोमवार को बताया कि इस वर्ष मानसून दीर्घकाल औसत (एलपीए) के 96 फीसदी रहने की संभावना है, जो कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। 

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एलपीए 1951 से 2000 के बीच हुई बारिश का औसत है, जो 89 सेंटीमीटर है। 90 से 95 फीसदी के बीच एलपीए सामान्य के करीब की श्रेणी का माना जाता है। इससे पहले आशंका थी कि मानसून पर अलनीनो का असर पड़ सकता है। विभाग अगला पूर्वानुमान जून में जारी करेगा।


क्या है अल-नीनो

 प्रशांत महासागर के भूमध्यीय क्षेत्र के समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में आये बदलाव के लिए उत्तरदायी समुद्री घटना को अल-नीनो (अल-नीनो या अल-निनो) कहा जाता है। इससे परिणाम स्वरूप समुद्र के सतह के जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका विस्तार 3 डिग्री दक्षिण से 18 डिग्री दक्षिण अक्षांश तक रहता है। 
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कहां होती है ये घटना

मानसून
यह दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित ईक्वाडोर और पेरु देशों के तट पर होती है। यह घटना कुछ सालों के अंतराल पर घटित होती है। 

यह होता है प्रभाव

अल-नीनो समुद्री हवाओं के दिशा बदलने, कमजोर पड़ने तथा समुद्र के सतही जल के ताप में वृद्धि में विशेष भूमिका निभाती है। अल-नीनो का एक प्रभाव यह होता है कि इससे वर्षा के प्रमुख क्षेत्र बदल जाते हैं। परिणामस्वरूप विश्व के ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में कम वर्षा और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ज्यादा वर्षा होने लगती है।

अलनीनो स्पेनिश भाषा का शब्द है। इसके शाब्दिक अर्थ छोटा बच्चा है। दक्षिण अमेरिकी प्रशान्त महासागर में क्रिसमस के तुरंत बाद समुद्र के पानी का अचानक असामान्य रूप से गर्म और ठंडा होने की घटना को ईसा मसीह के बाल्यकाल से जोड़ा गया है।
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यह होती है ला-नीना

monsoon
अल-नीनो के ठीक विपरीत ला नीना होती है। ला-नीना की स्थितियाँ पैदा होने पर भूमध्य रेखा के आस-पास प्रशान्त महासागर के पूर्वी तथा मध्य भाग में समुद्री सतह का तापमान असामान्य रूप से ठंडा हो जाता है। इसे कोल्ड इवेंट कहा जाता है। 

समुद्र के उपरी सतह का ठंडा होने की घटना अक्सर अल-नीनो के बाद आती है। लेकिन, यह जरूरी नहीं है कि हर बार इसे दोहराया जाए। कई बार ऐसी भी घटनाएं हुई हैं कि अल-नीनो के बाद ला-नीना न आकर फिर अल-नीनो की वापसी हो गई है। 

कहा जाता है कि प्रशांत महासागर में संचित उष्मा एक निश्चित समय के बाद अल-नीनो के रूप में  समुद्र से बाहर निकलती है। जिससे समुद्र के सतही जल के तापमान में वृद्धि होती है। लेकिन, उस निश्चित समय की गणना अभी भी ठीक-ठीक नहीं किया जा सकता है।  

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