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चिंताजनक : आठ भारतीय राज्यों पर जलवायु परिवर्तन से मंडराया खतरा

Sun, 18 Apr 2021 03:11 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

  • राष्ट्रीय जलवायु अतिसंवेदनशीलता मूल्यांकन रिपोर्ट में बताया गया इन राज्यों को बेहद संवेदनशील
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सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
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वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन से आठ भारतीय राज्यों पर खतरा मंडरा रहा है। राष्ट्रीय जलवायु अति संवेदनशीलता मूल्यांकन रिपोर्ट में झारखंड, मिजोरम, आसाम, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल को जलवायु परिवर्तन के प्रति बेहद अतिसंवेदनशील बताया गया है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि इन राज्यों समेत खासतौर पर देश के पूर्वी हिस्से को रूपांतरण हस्तक्षेप की प्राथमिकता पर रखने की जरूरत है। रिपोर्ट में इन आठों राज्यों में से असम, बिहार और झारखंड के 60 फीसदी जिलों को बेहद अतिसंवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रत्येक 100 ग्रामीण आबादियों पर वन क्षेत्र की कमी को आसाम के लिए अति संवेदनशीलता को बढ़ावा देने वाले मुख्य कारकों में से एक के तौर पर पाया गया है। यह हालात तब हैं, जब आसाम का 42  फीसदी हिस्सा घने जंगलों से ढका हुआ है। वन क्षेत्र के बाद सड़कों की सघनता को दूसरा मुख्य कारक आंका गया है।
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बिहार के मामले में रिपोर्ट के हिसाब से 36 जिलों में खराब स्वास्थ्य ढांचे को अहम अतिसंवदेशनील कारक माना गया है। इसके बाद उन 24 जिलों का नंबर है, जहां सीमांत और लघु परिचालन की हिस्सेदारी ज्यादा है।

बिहार के 14 जिलों में ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा को सही तरीके से लागू नहीं करना, जबकि 11 जिलों में श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी की कमी को अतिसंवेदनशीलता का कारक माना गया है। झारखंड में फसल बीमा की कमी और वर्षा आधारित खेती सबसे बड़े कारण के तौर पर सामने आई हैं।

हरियाणा, हिमाचल, पंजाब और उत्तराखंड भी शामिल
रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, सिक्किम और पंजाब को निमभन से मध्य श्रेणी के संवेदनशील राज्यों में, जबकि उत्तराखंड, हरियाणा, तमिलनाडु, केरल, नगालैंड, गोवा और महाराष्ट्र को निमभन श्रेणी के संवेदनशील राज्यों में शुमार किया गया है।

डीएसटी ने तैयार कराई है रिपोर्ट
‘भारत में समान ढांचे के उपयोग से रूपांतरण योजना के लिए जलवायु अति संवेदनशीलता मूल्यांकन’ रिपोर्ट को केंद्रीय विज्ञान व तकनीकी विभाग (डीएसटी) के सचिव आशुतोष शर्मा ने जारी किया है। डीएसटी ने यह रिपोर्ट द स्विस एजेंसी फॉर डवलपमेंट एंड कोऑपरेशन के साथ मिलकर तैयार कराई है।

इसके लिए 24 राज्यों व 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 94 प्रतिनिधियों को टीम में शामिल किया गया था। आईआईएससी के सेवानिवृत्त जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ प्रोफेसर एनएच रवींद्रनाथ, आईआईजी मंडी के निदेशक प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी और आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक टीजी सीतारमन ने राज्यों के इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए कदम उठाने की उम्मीद जताई है।
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डीएसटी के जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम के प्रमुख अखिलेश गुप्ता ने कहा कि डीएसटी अगले चरण में इस मूल्यांकन को उपजिला स्तर तक लेकर जाएगा।

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