असम में दीमा हसाओ में बचाव अभियान चलाती नौसेना की टीम।
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काला हो गया है खदान के अंदर का पानी
असम पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि खदान के अंदर भेजे गए आरओवी को कुछ भी पता नहीं चला है। बेहद मुश्किल भरी स्थिति के बीच यह फंसे हुए श्रमिकों की तलाश कर रहा है। खदान के अंदर का पानी पूरी तरह से काला हो गया है और कुछ भी ढूंढने में दिक्कत हो रही है। वहीं नौसेना के चार गोताखोर भी गहराई में फंसे हुए श्रमिकों को खोजने के लिए खदान के अंदर गए हैं। श्रमिकों का पता लगाने के लिए नौसेना, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, ओएनजीसी, कोल इंडिया और जिला प्रशासन की टीम काम कर रही है।
कोल इंडिया ने मंगाया पंप
अधिकारी ने बताया कि कोल इंडिया ने महाराष्ट्र से 500 गैलन प्रति मिनट की क्षमता वाला भारी दबाव पंप मंगाया है। यह कछार जिले के सिलचर हवाई अड्डे पर पहुंच गया है। जहां से एमआई-17 हेलीकॉप्टर से पंप के हिस्सों को 2-3 बार में लाया जाएगा। फिर इसे यहां साइट पर तैयार किया जाएगा। पहले से ही 5-6 पंप काम कर रहे हैं, लेकिन पानी में भारी गाद पंपों के लिए समस्या पैदा कर रही है। इसलिए भारी सबमर्सिबल पंप व्यवस्था की जा रही है।
असम में दीमा हसाओ में बचाव अभियान चलाती नौसेना की टीम।
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अवैध थी खदान
असम पुलिस के अधिकारी ने पुष्टि की कि खदान अवैध है और प्रतिबंध के बाद भी इसमें काम हो रहा था। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2014 में रैट होल खदानों पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि पूर्वोत्तर में अभी भी इस खतरनाक तरीके से कोयला निकाला जाता है। उन्होंने कहा कि खदान 310 फीट गहरी है। इसमें रैट होल तकनीक के माध्यम से कई चैनल बनाए गए थे। हमें लगता है कि चैनलों में से एक की दीवार टूट गई थी और पूरी खदान में पानी भर गया था। ऐसी भी संभावना है कि एक चैनल पास की किसी अप्रयुक्त खदान तक पहुंच गया हो, जिसमें पहले से ही पानी भरा हुआ था। दूसरी संभावना यह है कि एक चैनल भूमिगत जलाशय तक पहुंच गया हो और अचानक पानी बह निकला हो। इनकी हम अभी पुष्टि नहीं कर सकते हैं।
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