पीएनबी बैंक से साढ़े तेरह हजार करोड़ की ठगी कर फरार आरोपी मेहुल चोकसी को भारत लाने की सारी कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। एंटीगुआ सरकार ने फरार आरोपी मेहुल चौकसी को भारत भेजने से साफ इंकार किया है। प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि एंटीगुआ सरकार ने मेहुल को औपचारिक तौर पर गिरफ्तार करने से भी इंकार कर दिया है।
यही नहीं सूत्रों के मुताबिक, एंटीगुआ सरकार ने ये भी कह दिया है कि उनके देश का संविधान चौकसी की हिफाजत करता है, क्योंकि चौकसी को नियमों के मुताबिक नागरिकता दी गई है लिहाजा ना तो उसका पासपोर्ट रद्द किया जा सकता है और ना ही उसे प्रत्यर्पित किया जा सकता है। जानकारी ये भी मिल रही है कि एंटीगुआ सरकार ने राष्ट्रमंडल देश अधिनियम के तहत चोकसी को भारत को सौंपने का दावा नहीं माना और कहा कि भारत के साथ उसकी कोई प्रत्यर्पण संधि ही नहीं है।
गौरतलब है कि इससे पहले बीते नौ अगस्त को भारत सरकार ने बताया था कि एंटीगुआ और बरबुडा मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण को लेकर उसके अनुरोध पर गौर कर रहा है। मेहुल चोकसी भारत के सबसे बड़ी बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले में वांछित है और आज कल कैरेबियाई देश में रह रहा है।
विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में एक भारतीय टीम ने तीन अगस्त को एंटीगुआ को चोकसी के प्रत्यर्पण के लिए एक अनुरोध पत्र भी सौंपा था। दरअसल, चोकसी ने इस द्वीपीय देश की नागरिकता ले ली है।
प्रयर्पण निदेशालय ने बयान देकर बताया कि एंटीगुआ और बारबुडा के प्रत्यर्पण कानून, 1993 के तहत किसी भगोड़े को ऐसे किसी राष्ट्रमंडल देश को प्रत्यर्पित किया जा सकता है, जिसके साथ सामान्य या विशेष व्यवस्था या एक द्विपक्षीय संधि है। लेकिन अब एंटिगुआ ने चोकसी को भारत सौंपने से साफ कर दिया है।