आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले में ओएनजीसी के गैस कुएं में लगी आग को काबू में करने के प्रयास जारी हैं। 5 जनवरी को गैस रिसाव के बाद भीषण आग भड़क उठी थी, हालांकि अब उसकी तीव्रता कम हो गई है। ओएनजीसी की टीमें फिलहाल मलबा हटाने में जुटी हैं।
आंध्र प्रदेश के डॉ. बीआर अंबेडकर कोनसीमा जिला में स्थित ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के एक गैस कुएं में लगी आग को बुझाने के प्रयास शुक्रवार को भी जारी रहे। ओएनजीसी की टीमें फिलहाल घटनास्थल से मलबा हटाने के काम पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं, ताकि इसके बाद कुएं के मुंह पर तकनीकी कार्रवाई की जा सके।
5 जनवरी को मोरी और इरसुमंदा गांवों के पास ओएनजीसी के कुएं 'मोरी-5' में गैस रिसाव के बाद भीषण आग भड़क उठी थी। आग की लपटें करीब 20 मीटर ऊंची और लगभग 25 मीटर चौड़ी बताई गईं। हालांकि अब कुएं की तीव्रता में कमी आई है। एक अधिकारी ने बताया कि मलबा हटाया जा रहा है। संभव है कि एक से दो दिन में सारा मलबा साफ हो जाए। उसके बाद ही वेलहेड पर काम शुरू किया जा सकेगा।
ब्लोआउट की स्थिति क्या है?
तेल व गैस उद्योग में 'ब्लोआउट' उस स्थिति को कहा जाता है, जब दबाव नियंत्रण प्रणालियों के विफल होने के कारण तेल या प्राकृतिक गैस अनियंत्रित रूप से बाहर निकलने लगती है। इस घटना के बाद ओएनजीसी की टीमें पिछले तीन दिनों से आग बुझाने और ब्लोआउट नियंत्रण अभियानों में जुटी हुई हैं।
अभी की स्थिति क्या है?
कोनसीमा के हरे-भरे और सिंचित क्षेत्र में स्थित यह गैस कुआं ओएनजीसी के प्रोडक्शन एन्हांसमेंट कॉन्ट्रैक्टर के रूप में काम कर रही अहमदाबाद स्थित सूचीबद्ध कंपनी दीप इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा संचालित किया जा रहा था। हादसे के बाद ओएनजीसी के वरिष्ठ प्रबंधन ने सीधे ऑपरेशनल कंट्रोल संभाल लिया है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आग पर पूरी तरह काबू पाने के लिए ओएनजीसी अमेरिका की विशेषज्ञ कंपनी वाइल्ड वेल कंट्रोल की सेवाएं लेगी या नहीं। यह कंपनी तेल और गैस कुओं में आपात स्थिति, दबाव नियंत्रण और ब्लोआउट जैसी घटनाओं से निपटने में विशेषज्ञ मानी जाती है।