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हिंदी-अंग्रेजी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं में भी होगी उच्च शिक्षा की पढ़ाई, ताकि कॉलेज न छोड़ें छात्र

Fri, 12 Jul 2019 12:50 AM IST
Nilesh Kumar सीमा शर्मा, नई दिल्ली

सार

  • 60 लाख छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य
  • केंद्र सरकार खोलेगी पांच हजार लर्नर स्पोर्ट सेंटर
  • 16 लाख एससी/एसटी छात्रों के लिए बनेंगे 8,000 हॉस्टल
  • ब्रिज कोर्स में सॉफ्ट स्किल और गणित पर रहेगा फोकस
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उच्च शिक्षा में युवाओं की संख्या बढ़ाने के लिए अब हिंदी और अंग्रेजी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में भी पढ़ाई का मौका मिलेगा। केंद्र सरकार स्कूली शिक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले 60 लाख युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए 5,000 लर्नर स्पोर्ट सेंटर खोलेगी। योजना में इग्नू राज्यों की स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी का सहयोग करेगी। 

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खास बात यह है कि 16 लाख एससी/एसटी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए 8,000 हॉस्टल बनेंगे। उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में भी यह योजनाएं लागू होंगी। 

मानव संसाधन विकास मंत्रालय देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। इसके लिए 2019 से 2024 तक का रोडमैप तैयार कर राज्य सरकारों के साथ साझा किया है। इसमें अलग-अलग बिंदुओं पर काम होगा।
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सरकार का उद्देश्य उच्च शिक्षा का ग्रास एनरोलमेंट रेशो 25.2 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी तक पहुंचाना है। यानी, देश के हर युवा को शिक्षित करने के साथ रोजगार से जोड़ना है। ग्रास एनरोलमेंट रेशो बढ़ाने के लिए ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) मदद करेगा। 

इसके अलावा इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) के 56 रिजनल सेंटर को अपग्रेड किया जाएगा। इग्नू सभी राज्यों की ओपन यूनिवर्सिटी और रिजनल सेंटर में विभिन्न प्रोग्राम व कोर्स का पाठ्यक्रम उनकी क्षेत्रीय भाषा में उपलब्ध कराएगा। क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने का उद्देश्य युवाओं को किसी भी माध्यम से शिक्षा से जोड़ना है।  

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500 कॉलेज बनेंगे वोकेशनल डिग्री कॉलेज

सरकार उच्च शिक्षा के साथ कौशल विकास पर भी जोर दे रही है, जिसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार से जोड़ना या अपना कामकाज शुरू कराना है। इसलिए पिछड़े इलाकों के 500 मॉडल डिग्री कॉलेजों को वोकेशनल डिग्री कॉलेज में तब्दील किया जाएगा। इन कॉलेजों में बैचलर ऑफ वोकेशनल डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई होगी। इसके अलावा मूक स्वयं प्लेटफार्म पर 3 हजार वोकेशनल कोर्स शुरू होंगे। 
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अनुसूचित जाति व जनजाति की 50 फीसदी फीस माफ

16 लाख एससी/एसटी युवाओं के लिए पिछड़े इलाकों के कॉलेज मॉडल डिग्री कॉलेज में बदल जाएंगे। नए कॉलेज भी खोले जाएंगे। यहां पर आरक्षित वर्ग के पिछड़े इलाकों के विद्यार्थियों की 50 फीसदी फीस माफ होगी। इन्हें आगे बढ़ाने के लिए ब्रिज कोर्स कोस चलेंगे। पहले वर्ष में मैथमेटिक्स व सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग पर जोर रहेगा।
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