एडिटर्स गिल्ड (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) से अपील की है कि वह विदेशी सामग्री के अनियमित प्रसारण के खिलाफ आगाह करने वाले अनिष्टकर लग रहे परामर्श को वापस लें, क्योंकि इसके प्रभाव परेशान करने वाले हैं।
गिल्ड ने एक बयान में कहा कि वह मीडिया को 25 नंवबर को पीसीआई द्वारा जारी अकारण परामर्श से परेशान है। उन्होंने कहा, परिषद मीडिया के स्वनियमन की वकालत करता है और उसका मानना है कि किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप प्रेस की स्वतंत्रता के लिए खतरनाक होगा, लेकिन ऐसा मालूम पड़ता है कि वह ऐसे कदम को समर्थन दे रहा है, जिससे एक प्रकार की सेंसरशिप लागू होगी और अवांछनीय समझी जाने वाली सामग्री प्रकाशित करने वाले संगठनों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।
शनिवार को जारी बयान में कहा गया कि परामर्श में यह नहीं बताया गया कि सामग्री की पुष्टि कौन करेगा, इसे किस आधार पर सत्यापित किया जाएगा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनियमित प्रसार का मतलब क्या होता है।
गिल्ड ने कहा कि देश में कई प्रकाशन विदेशी एजेंसियों, समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं को लाइसेंस देते हैं और उनकी सामग्री को नए स्वरूप में प्रस्तुत करते हैं, जो कि संपादक का विशेषाधिकार होता है और जो अपने प्रकाशन में प्रकाशित हर प्रकार की सामग्री के लिए जिम्मेदार होता है।