प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) और इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) से जुड़े आतंकी वित्तपोषण के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत राजू खान की लगभग 6.34 लाख रुपये की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। ईडी ने छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित खमतराई पुलिस स्टेशन में धीरज साव और अन्य के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि कुछ बैंक खातों का इस्तेमाल 'पाकिस्तान के खालिद' नामक व्यक्ति के निर्देश पर भारत में अज्ञात व्यक्तियों से धन प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था। प्राप्त राशि को प्रतिबंधित संगठनों 'सिमी' और 'आईएम' के कथित सदस्यों जुबैर हुसैन, आयशा बानो और राजू खान को हस्तांतरित किया जा रहा था।
ईडी की जांच से पता चला कि धीरज साओ (उर्फ धीरज कुमार), खालिद के इशारे पर, विभिन्न स्रोतों से नकद जमा के रूप में प्राप्त धन को डायवर्ट करने के लिए कई बैंक खातों का दुरुपयोग करने में लगा हुआ था। ये धनराशि जुबैर हुसैन, आयशा बानो और अन्य के खातों में सीधे या कई लेयरिंग के माध्यम से भेजी जाती थी। राजू खान इस नेटवर्क के प्रमुख माध्यमों में से एक था। उसने अपने बैंक खाते में नकद जमा प्राप्त किए, तुरंत राशि निकाल ली और खालिद और धीरज साओ के निर्देशानुसार व्यक्तियों को सौंप दी।
ईडी के मुताबिक, राजू खान के बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला है कि उपरोक्त सिंडिकेट द्वारा उसके खाते में कुल 48,82,629 रुपये जमा किए गए थे। इसमें से उसने लगभग 13% यानी 6,34,741 रुपये का कमीशन (अपराध की आय) अपने पास रखने के बाद, आतंकवादी संगठनों जैसे सिमी और आईएम से जुड़े अन्य व्यक्तियों को 42,47,888 रुपये नकद हस्तांतरित कर दिए। ईडी द्वारा अब तक 9,15,836/- रुपये (चल और अचल) मूल्य की संपत्तियां अनंतिम रूप से कुर्क की जा चुकी हैं।