तोमर केस में ईडी की बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय, मुख्यालय कार्यालय, नई दिल्ली ने दो अगस्त को चिराग तोमर, उनके परिवार के सदस्यों और संबंधित संस्थाओं से संबंधित 42.8 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क करने का एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया है। अनंतिम रूप से कुर्क की गई संपत्तियों में दिल्ली में 18 अचल संपत्तियां और बैंक खातों में जमा राशि शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय ने एक अखबार की रिपोर्ट के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी।
चिराग तोमर नाम के एक भारतीय नागरिक को क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज वेबसाइट कॉइनबेस की नकल करने वाली वेबसाइटों के इस्तेमाल के जरिए 20 मिलियन डॉलर से अधिक की चोरी करने के आरोप में अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था। जांच से पता चला है कि चिराग तोमर, जो वर्तमान में अमेरिका में हिरासत में है, क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज "कॉइनबेस" की वेबसाइट को स्पूफ करके और लगभग 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी चुराकर बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी में शामिल था।
उच्च रिटर्न का झूठा वादा कर आम जनता से वसूले 3 करोड़
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने 28 जुलाई को कृष्ण कुमार उर्फ विजय कुमार जायसवाल उर्फ विजय किशन जायसवाल, उनकी पत्नी रश्मि उर्फ रश्मि जायसवाल और उनके द्वारा प्रवर्तित 3 कंपनियों, जिनमें वे निदेशक हैं, सहित 5 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय (पीएमएलए), उत्तरी गोवा में अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह भियोजन शिकायत, पीएमएलए की धारा 3 के तहत परिभाषित धन शोधन के अपराध के लिए दायर की गई है, जो अधिनियम की धारा 4 के तहत दंडनीय है।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, यह मामला कृष्ण कुमार उर्फ विजय कुमार जायसवाल उर्फ विजय किशन जायसवाल और अन्य के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा दर्ज कई एफआईआर से उत्पन्न हुआ है। गोवा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं, गोवा जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण (वित्तीय प्रतिष्ठान) अधिनियम, 1999 और पुरस्कार चिट्स और धन परिसंचरण योजना (प्रतिबंध) अधिनियम, 1978 के तहत अपराधों के लिए, जिनमें से आईपीसी 1860 की धारा 420 और 120 बी पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध हैं।
ED: वसीयत/बिक्री विलेख में धोखाधड़ी कर खरीदी अचल संपत्तियां, बेदाग बता लोगों को बेची, 212.85 करोड़ की अपराध की आय
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने 31 जुलाई को रोहन हरमलकर, अलकांत्रो डिसूजा, एस्टेवन एल्विस डिसूजा, मोहम्मद सुहैल और समीर कालिदास सतार्डेकर के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत विशेष पीएमएलए न्यायालय, मापुसा, गोवा के समक्ष अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है। इस मामले में वसीयत, वंशावली रिकॉर्ड और बिक्री विलेख में धोखाधड़ी कर खरीदी अचल संपत्तियां खरीदी गई। बाद में उन्हें बेदाग बताकर लोगों को बेच दिया। ईडी की जांच के अनुसार, आरोपियों ने ऐसा कर 212.85 करोड़ की अपराध की आय एकत्रित की है।
ईडी ने गोवा पुलिस द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। इस केस में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश, जिसमें बर्देज़ तालुका, उत्तरी गोवा में अचल संपत्तियों का धोखाधड़ी से हस्तांतरण और बिक्री शामिल है, विभिन्न अपराधों को लेकर मामला दर्ज किया गया था। ईडी की जांच से पता चला है कि रोहन हरमलकर के नेतृत्व में आरोपियों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर, वसीयत, सूची कार्यवाही, वंशावली रिकॉर्ड और बिक्री विलेख जैसे जाली दस्तावेज़ों के ज़रिए धोखाधड़ी से कई अचल संपत्तियाँ अर्जित कीं। फिर इन संपत्तियों को बेदाग बताकर तीसरे पक्ष के खरीदारों को बेच दिया गया, जिससे अपराध की आय का शोधन हुआ।
जांच के दौरान, पीएमएलए की धारा 17(1) के तहत आरोपियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई, जिसके परिणामस्वरूप भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए और कई बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए। ईडी की जांच में सामने आया है कि रोहन हरमलकर को 03.06.2025 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। जाँच से पता चला है कि उसने जालसाजी को अंजाम देने, नकली दस्तावेज़ तैयार करने और नकद तथा बैंकिंग माध्यमों से पर्याप्त वित्तीय लाभ प्राप्त करने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी।