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ED: धोखाधड़ी कर 'यूनियन बैंक ऑफ इंडिया' को पहुंचाया 122 करोड़ रुपये का नुकसान, 47 करोड़ रुपये की गई कुर्की

Wed, 17 Sep 2025 08:39 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ईडी - फोटो : सोशल मीडिया
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने गत सप्ताह विशेष न्यायालय (पीएमएलए), बेंगलुरु के समक्ष मेसर्स एसोसिएट लम्बर्स प्राइवेट लिमिटेड (एएलपीएल) और 17 अन्य आरोपियों के खिलाफ 122 करोड़ रुपये (ब्याज सहित) की बैंक धोखाधड़ी से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग जांच में अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है। आरोपियों ने धोखाधड़ी कर 'यूनियन बैंक ऑफ इंडिया' 122 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा दिया। अब ईडी की कार्रवाई में आरोपियों की 47 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की गई है। ईडी ने सीबीआई, एसीबी बेंगलुरु द्वारा मेसर्स एएलपीएल, इसके निदेशकों और अन्य के खिलाफ आईपीसी 1860 व भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। 

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ईडी की जांच से पता चला है कि कंपनी मेसर्स एसोसिएट लम्बर्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसका प्रतिनिधित्व इसके निदेशकों मोहम्मद फारूक सुलेमान दरवेश, मनोहरलाल सतरामदास अगीचा, श्रीचंद सतरामदास अगीचा, इब्राहिम सुलेमान दरवेश ने किया, ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (पूर्ववर्ती कॉर्पोरेशन बैंक) को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने स्वीकृत ऋण राशि को मेसर्स एएलपीएल की सहयोगी कंपनियों को असुरक्षित ऋण के रूप में या मेसर्स एएलपीएल और मेसर्स टचवुड रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड आदि के नाम पर संपत्ति खरीदने के लिए अन्य फर्मों को देकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। इससे एनपीए की तिथि तक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 56 करोड़ रुपये (लगभग) का नुकसान हो गया। ईडी के मुताबिक, बाद में बैंक द्वारा दर्ज की गई शिकायत की तिथि तक बैंक को ब्याज सहित कुल 122 करोड़ रुपये (लगभग) का नुकसान हुआ था। 

प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आया है कि मेसर्स एएलपीएल ने अपने टर्नओवर को बढ़ाकर अपनी आहरण शक्ति (डीपी) को बढ़ाने के लिए केवल अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ किसी वास्तविक व्यावसायिक संबंध के बिना कई 'समायोजनात्मक प्रविष्टियां' की थीं। इसका नतीजा यह हुआ कि मेसर्स एएलपीएल ने शिकायतकर्ता बैंक से 60 करोड़ रुपये की नवीनीकृत क्रेडिट सुविधाएं प्राप्त कीं। इसका यह निष्कर्ष निकाला गया है कि मेसर्स एएलपीएल और उसकी सहयोगी कंपनियां समायोजनात्मक प्रविष्टियों में शामिल थीं, जिन्होंने ज्यादा दिखाए गए टर्नओवर के आधार पर मेसर्स एएलपीएल की क्रेडिट सुविधाओं के नवीनीकरण की सुविधा प्रदान की। इतना ही नहीं, इन्होंने सहयोगी कंपनियों की ऋण आय को घुमाने की भी सुविधा प्रदान की। 
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इसके अलावा, अचल संपत्तियों की खरीद और सहयोगी कंपनियों की ओर से बैंकों के साथ सहयोगी कंपनियों/ओटीएस के ऋणों के निपटान के लिए भी धनराशि को डायवर्ट किया गया। स्टॉक की बिक्री से प्राप्त राजस्व को ऋण खाते के माध्यम से नहीं भेजा गया। इसके अलावा, लकड़ी के आयात के लिए अग्रिम भुगतान के रूप में पनामा और कोस्टा रिका की संस्थाओं को भी धनराशि हस्तांतरित की गई है, जो एएलपीएल के निदेशकों में से एक के रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित हैं। 

ऐसी आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से, अभियुक्तों ने करोड़ों रुपये की आपराधिक आय अर्जित की। 11 सितंबर के के अनंतिम कुर्की आदेश के तहत लगभग 4 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क की गई है। इससे पहले 2024 में, ईडी ने मेसर्स एएलपीएल के निदेशकों की लगभग 43 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति भी कुर्क की थी, जिससे इस मामले में अभी तक कुल 47 करोड़ रुपये की कुर्की हुई थी। मामले की जांच जारी है।

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दुबई स्थित मास्टरमाइंड ने खेला धोखाधड़ी का खेल, भारी रिटर्न का वादा कर सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश जुटाया 
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय ने भारत में एक प्रमुख एजेंट, हरिंदर पाल सिंह को बुधवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत क्यूएफएक्स/वाईएफएक्स/बॉटब्रो प्लेटफॉर्म के माध्यम से बड़े पैमाने पर किए गए निवेश धोखाधड़ी के संबंध में गिरफ्तार किया है। पीएमएलए के अंतर्गत विशेष अदालत, चंडीगढ़ ने आरोपी को 09 दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया है।

हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में आईपीसी, 1860 की धारा 120बी, 406 और 420 के तहत दर्ज कई एफआईआर के आधार पर ईडी ने उक्त केस की जाँच शुरू की थी। इन एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि क्यूएफएक्स समूह की कंपनियों और उनके एजेंटों ने कथित विदेशी मुद्रा व्यापार योजनाओं के ज़रिए सुनिश्चित मासिक रिटर्न का वादा करके हज़ारों निवेशकों को ठगा। जाँच से पता चला कि नवाब उर्फ लविश चौधरी (जो वर्तमान में दुबई से काम कर रहा है) द्वारा संचालित इस सिंडिकेट ने एक अनियमित जमा योजना के ज़रिए सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश जुटाया, जिसमें 5-6% मासिक रिटर्न का वादा किया गया था।

ईडी की जांच से पता चला है कि भारत में शीर्ष एजेंटों के एक नेटवर्क के माध्यम से धन एकत्र किया गया था। उसके बाद धन के मूल को छिपाने के लिए कई शेल कंपनियों और भुगतान गेटवे के माध्यम से स्तरित किया गया था। इसके अलावा, निवेश के लिए जनता को प्रदान किए गए प्लेटफॉर्म, हर कुछ महीनों में बदलते रहते हैं ताकि अधिक से अधिक निर्दोष निवेशकों को धोखाधड़ी वाले घोटाले में फंसाया जा सके। सबूतों से यह भी पता चला कि "सिंह ब्रदर्स टीम" के प्रमुख हरिंदर पाल सिंह भारत स्थित एजेंटों के नेटवर्क और दुबई स्थित मास्टरमाइंड के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण, उन्हें 17.09.2025 को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले, ईडी ने भारत में कई स्थानों पर 11.02.2025 और 04.07.2025 को पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी भी ली थी।

ईडी उन धोखाधड़ी वाले निवेश सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है जो भ्रामक एमएलएम योजनाओं और अनधिकृत विदेशी मुद्रा प्लेटफार्मों के माध्यम से बेखबर निवेशकों का शोषण करते हैं। ईडी ने जनता से अपील की है कि वे सावधानी बरतें और अपनी गाढ़ी कमाई को दांव पर लगाने से पहले निवेश योजनाओं की वैधता की पुष्टि कर लें। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे असामान्य रूप से उच्च रिटर्न के प्रस्तावों के झांसे में न आएँ और किसी भी संदिग्ध योजना की सूचना कानून प्रवर्तन अधिकारियों को दें। इस केस में शेष ‘अपराध की आय’ का पता लगाने, अन्य एजेंटों की पहचान करने और विदेशी न्यायालयों से संचालित मास्टरमाइंडों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए मामले की आगे की जाँच जारी है।
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