प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 जुलाई को कोलार-चिक्कबल्लपुरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड, (कोमुल) भर्ती घोटाला, 2023 से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मालूर कांग्रेस विधायक के वाई नानजेगौड़ा और अन्य की 1.32 करोड़ रुपये (लगभग) मूल्य की अचल और चल संपत्तियों को कुर्क करने का अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया है।
ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत मालूर तालुक में उनकी अध्यक्षता में भूमि अनुदान घोटाले के संबंध में की गई जांच और तलाशी के दौरान एकत्र की गई सामग्री के आधार पर मालूर कांग्रेस विधायक के वाई नानजेगौड़ा और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। ईडी ने इस संबंध में लोकायुक्त पुलिस को भी संदर्भ दिया है और उक्त घोटाले को दर्ज करने के अपने प्रयासों में एमपी/एमएलए मामलों के परीक्षण के लिए विशेष न्यायालय के समक्ष शिकायत दर्ज की है।
राजनीतिक व्यक्तियों की सिफारिश के बदले हेराफेरी
ईडी की जांच से पता चला है कि कोमुल द्वारा वर्ष 2023 के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया में पैसे लेकर या राजनीतिक व्यक्तियों की सिफारिश के बदले हेराफेरी की गई थी। इसमें लिखित परीक्षा और साक्षात्कार भी शामिल थे। कोमुल के अध्यक्ष, विधायक के वाई नानजेगौड़ा और कोमुल के प्रबंध निदेशक केएन गोपाल मूर्ति के नेतृत्व वाली भर्ती समिति ने कोमुल के अन्य निदेशकों के साथ मिलकर एक साजिश रची। इसके परिणामस्वरूप कुछ कम योग्य उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया। योग्य उम्मीदवारों को वंचित रखा गया।
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ईडी को जांच के दौरान कुछ सबूत भी मिले हैं। इनमें समानांतर ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ का भी पता लगा है। तलाशी की कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए साक्ष्यों में राजनेताओं से प्राप्त व्हाट्सएप संदेश भी मिले हैं। इन संदेशों में कुछ उम्मीदवारों की सिफारिश करना और के वाई नंजेगौड़ा और अन्य निदेशकों द्वारा कोमुल के कर्मचारियों को अग्रेषित करना, आदि शामिल है। कोमुल और मैंगलोर विश्वविद्यालय के स्तर पर पूरी भर्ती प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक खामियां देखी गई हैं।
उम्मीदवारों से वसूली गई इतनी राशि
भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता को छिपाने के प्रयास किए गए हैं। कोमुल के निदेशकों और कर्मचारियों द्वारा एग्जाम ब्रांच में अवैध प्रवेश किया गया। मैंगलोर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, नागेंद्र प्रसाद और कुछ उम्मीदवार जिन्हें परीक्षा में समायोजित किया गया था, उन्होंने (कोमुल) 2023 की भर्ती में एक बड़े घोटाले का खुलासा किया है। तलाशी के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों के अनुसार, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों चरणों के दौरान भर्ती प्रक्रिया में हेराफेरी करके अपराध की आय के रूप में 1,56,50,000/- रुपये की राशि अर्जित की गई। इसके बदले में उम्मीदवारों से कोमुल भर्ती, 2023 में उनके चयन का आश्वासन देकर मौद्रिक लाभ स्वीकार किया गया।
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के.वाई. नंजेगौड़ा इस घोटाले के प्रमुख वास्तुकार के रूप में उभरे, जिन्होंने कोमुल के अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका का लाभ उठाकर समग्र भर्ती को नियंत्रित किया। बयानों और साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि उन्होंने आरक्षित सीटों की संख्या तय करने, रिश्वत कैसे एकत्र की जाए, इसकी योजना बनाने और लिखित परीक्षा की ओएमआर शीट और साक्षात्कार के अंकों में हेराफेरी करने का निर्देश देने में अग्रणी भूमिका निभाई। इससे अनुशंसित या भुगतान करने वाले उम्मीदवारों का चयन हो, यह सुनिश्चित हो सका। इस प्रकार उन्होंने अवैध रूप से खुद को 80 लाख रुपये (कुल 1.56 करोड़ रुपये की आय में से) से समृद्ध किया है।