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आर्थिक अपराधों पर नकेल: ईडी ने पिछले साल जब्त कीं 81422 करोड़ की संपत्तियां, 94% पहुंची दोष सिद्धि दर

Sat, 02 May 2026 04:11 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

प्रवर्तन निदेशालय के पूरे ट्रायल्स में उच्च प्रतिशत दर के बावजूद, कुल मामलों का केवल एक छोटा हिस्सा ही अंतिम निर्णय तक पहुंच पाया है। दर्ज कुल मामलों में से इस साल 31 मार्च तक विभिन्न विशेष अदालतों द्वारा केवल लगभग 60 मामलों का ही पूर्ण निपटारा किया गया है।
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ईडी के निदेशक राहुल नवीन - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश की प्रमुख जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने आर्थिक अपराधियों पर नकेल कसने हुए पिछले वित्त वर्ष में 81,422 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की है। इसमें से 63,142 करोड़ रुपये बैंकों, निवेशकों और घर खरीददार को वापस दिलाए जा चुके हैं।
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ईडी का कहना है कि अब तमाम मामलों में मनी ट्रेल के जरिये अपराधियों तक पहुंचने में सफलता मिल रही है। लाल किला ब्लास्ट केस में की गई कार्रवाई को इसका उदाहरण है। प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को अपने 70वें स्थापना दिवस पर जारी नवीनतम रिपोर्ट में यह भी बताया कि दोष सिद्धि दर 94% तक पहुंच गई है। हालांकि, अभी 2,400 से ज्यादा मामले कोर्ट में लंबित हैं।

कुल मामलों में से सिर्फ 60 का ही पूर्ण निपटारा
प्रवर्तन निदेशालय के पूरे ट्रायल्स में उच्च प्रतिशत दर के बावजूद, कुल मामलों का केवल एक छोटा हिस्सा ही अंतिम निर्णय तक पहुंच पाया है। दर्ज कुल मामलों में से इस साल 31 मार्च तक विभिन्न विशेष अदालतों द्वारा केवल लगभग 60 मामलों का ही पूर्ण निपटारा किया गया है।
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विदेश भागे अपराधियों पर भी शिकंजा
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत विदेश भागे आर्थिक अपराधियों पर भी ईडी ने शिकंजा कसा है। 31 मार्च 2026 तक तक 54 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। इनमें से 21 को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है। इनकी 2,178 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।

डिजिटल अरेस्ट, विदेशी हस्तक्षेप जैसे खतरों के खिलाफ पीएमएलए के 800 मामले दर्ज
ईडी की नई जोखिम मूल्यांकन समिति के कारण पिछले सात महीनों में डिजिटल अरेस्ट, विदेशी हस्तक्षेप, राष्ट्रीय हित के खिलाफ पैरवी और बौद्धिक संपदा धोखाधड़ी जैसे उभरते खतरों से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के लगभग 800 मामले दर्ज किए गए हैं। ईडी निदेशक राहुल नवीन ने बताया कि इस समिति की अक्तूबर, 2025 से अब तक कुल 91 बैठकें हुई हैं जिनमें कुल 794 मामले दर्ज करने की मंजूरी दी गई।
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