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Extortion Case: कोलकाता के पूर्व पुलिस अफसर के घर फिर पहुंची ED, तालाब में मोबाइल तलाशने के लिए लगाए गोताखोर

Tue, 26 May 2026 10:03 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, कोलकाता।

सार

Extortion Case: ईडी ने 'सोना पप्पू' वसूली और जमीन कब्जा मामले में गिरफ्तार पूर्व पुलिस अधिकारी शांतनु सिन्हा बिस्वास के घर पर दोबारा छापा मारा। एजेंसी को शक है कि अहम सबूत वाले मोबाइल फोन घर में छिपाए गए हैं या तालाब में फेंक दिए गए हैं। मामले में कई पुलिसकर्मियों, अवैध लेनदेन, बेनामी संपत्तियों और विदेश निवेश की भी जांच की जा रही है। पढ़िए रिपोर्ट-
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ईडी - फोटो : एडॉब स्टॉक
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विस्तार
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को कथित 'सोना पप्पू' वसूली और जमीन कब्जा मामले में गिरफ्तार कोलकाता के पूर्व पुलिस अधिकारी शांतनु सिन्हा बिस्वास के कांडी स्थित घर पर फिर से तलाशी अभियान चलाया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
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जांचकर्ताओं को शक है कि बिस्वास की ओर से इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन या तो बड़े घर में कहीं छिपाए गए हैं या फिर सबूत मिटाने के लिए घर के परिसर में मौजूद तालाब में फेंक दिए गए हैं। 

अधिकारी ने बताया, हमें शक है कि आरोपी ने जानबूझकर मोबाइल फोन छिपाए या नष्ट किए हैं, ताकि सबूत खत्म किए जा सकें। जानकारी मिली है कि फोन घर के पास वाले तालाब में फेंके गए हो सकते हैं। उसी के अनुसार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और गोताखोरों को भी लगाया गया है। इस घटना की तुलना पहले हुए भर्ती घोटाले से की जा रही है, जिसमें पूर्व बरानगर विधायक जीवन कृष्ण साहा पर आरोप था कि उन्होंने जांच से बचने के लिए अपना मोबाइल फोन तालाब में फेंक दिया था।
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ईडी ने बिस्वास को कथित वसूली गिरोह से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। इससे पहले मुर्शिदाबाद जिले के कांडी शहर में स्थित उनके आलीशान घर पर छापेमारी के दौरान अधिकारियों को बड़ी मात्रा में सोना मिला था।

ईडी के एक अधिकारी ने कहा कि लापता मोबाइल फोन में मामले से जुड़े 'अहम डिजिटल सबूत' हो सकते हैं। अधिकारी के अनुसार, एजेंसी करीब 30 पुलिसकर्मियों की कथित भूमिका की जांच कर रही है। इनमें उप-निरीक्षक, सहायक उप-निरीक्षक और कांस्टेबल शामिल हैं। इन पर वसूली, अवैध जमीन कब्जा और शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन जैसे मामलों में 'सोना पप्पू' नेटवर्क से जुड़े होने का शक है।

ईडी का क्या आरोप है?
ईडी का आरोप है कि इलाके में बिल्डरों, पुलिसकर्मियों और अपराधियों का एक गिरोह काम कर रहा था, जिसमें बिस्वास की अहम भूमिका थी। अधिकारी ने कहा, बिस्वास ने पुलिस विभाग में अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल जमीन कब्जाने और वसूली गतिविधियों में मदद करने के लिए किया। हमने कई पुलिसकर्मियों की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल संचालन और वित्तीय सहायता के लिए किया गया था।

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किन चीजों की जांच की जा रही है?
जांचकर्ताओं को शक है कि कुछ पुलिसकर्मी पुलिस कल्याण गतिविधियों से जुड़े थे और बिस्वास के कहने पर अवैध लेनदेन और धनशोधन में मदद कर रहे थे। एजेंसी कांडी और आसपास के इलाकों में बिस्वास द्वारा होटल, बार और रिसॉर्ट में किए गए कथित निवेश की भी जांच कर रही है।
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ईडी के अधिकारियों ने कहा कि वे पूर्व पुलिस अधिकारी से जुड़े विदेश में निवेश और बेनामी संपत्तियों की भी जांच कर रहे हैं। इसमें पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में कथित कारोबारी हित भी शामिल हैं। अधिकारी ने कहा, हम सभी वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहे हैं, जिनमें संभावित विदेशी निवेश और दूसरों के नाम पर रखी गई संपत्तियां भी शामिल हैं।
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