फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ED: 5,000 करोड़ रुपये के लेनदेन में से 10% ही असली, सरकारी प्रोग्राम में 137 करोड़ रुपये की धनराशि का गबन

Thu, 20 Nov 2025 06:40 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
ED - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुंबई जोनल कार्यालय ने सुमाया समूह की कंपनियों के प्रमोटर उशिक गाला को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। सुमाया समूह के संबंध में चल रही जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों की विस्तृत जांच और विश्लेषण के बाद 17 नवंबर को यह गिरफ्तारी हुई है। उन्हें 24 नवंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है। सरकार के 'नीड टू फीड' प्रोग्राम में 5,000 करोड़ रुपये के लेनदेन में से केवल 10 प्रतिशत ही असली निकला। इस प्रोग्राम में 137 करोड़ रुपये की धनराशि का गबन करने का आरोप है।  
विज्ञापन

 
ईडी ने वर्ली पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की थी। इसे बाद में ईओडब्ल्यू मुंबई ने अपने हाथ में ले लिया। मेसर्स डेंटसु कम्युनिकेशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स सुमाया इंडस्ट्रीज लिमिटेड और इसके प्रमोटरों सहित अन्य के खिलाफ जांच प्रारंभ हुई। उक्त कंपनियों पर एक साथ साजिश रचने और 'नीड टू फीड प्रोग्राम' के लाभों का वादा करने की आड़ में 137 करोड़ रुपये की धनराशि का गबन करने का आरोप है।

ईडी की जांच से यह भी पता चलता है कि सुमाया समूह और मेसर्स डेंटसु इंडिया के कुछ कर्मचारियों ने व्यापार वित्तपोषण के माध्यम से धन प्राप्त करने के लिए "नीड टू फीड" कार्यक्रम की आड़ में हरियाणा सरकार का एक फर्जी ठेका तैयार किया। इससे गैर-मौजूद व्यावसायिक कार्यों को वास्तविक कारोबार के रूप में प्रस्तुत किया गया। जांच से पता चलता है कि सुमाया समूह की संस्थाओं द्वारा प्राप्त धनराशि को उशिक गाला ने एक एजेंट के माध्यम से दिल्ली और हरियाणा स्थित नकली कृषि-व्यापारी संस्थाओं को वास्तविक खरीद को गलत तरीके से दर्शाने के लिए भेजा। कोई वास्तविक कृषि खरीद नहीं हुई। इसके बजाय, अन्य फर्जी संस्थाओं से नकद और आरटीजीएस प्रविष्टियों के संयोजन के माध्यम से, डायवर्ट की गई धनराशि उशिक गाला को वापस भेज दी गई।
विज्ञापन


मेसर्स सुमाया ने बड़े पैमाने पर व्यापार का दिखावा करने के लिए फर्जी चालान और लॉरी रसीदें बनाईं। इसके परिणामस्वरूप 5,000 करोड़ रुपये के सर्कुलर लेनदेन हुए, जिनमें से केवल 10 प्रतिशत ही असली थे। ये लेनदेन सर्कुलर पैटर्न में किए गए थे, जिससे मेसर्स डेंटसु इंडिया सहित संबंधित संस्थाओं के टर्नओवर में वृद्धि हुई। इन बढ़ा-चढ़ाकर किए गए लेनदेन ने सुमाया के टर्नओवर को कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया (दो वर्षों में 210 करोड़ रुपये से 6,700 करोड़ रुपये तक)। इसके शेयर की कीमत में भारी उछाल आया, जिससे इसके सूचीबद्ध समूह संस्थाओं के निवेशकों के लिए एक भ्रामक तस्वीर सामने आई।

इससे पहले, ईडी ने इस जांच के सिलसिले में मुंबई, दिल्ली और गुड़गांव में 19 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी के दौरान, ईडी ने चल संपत्ति और बड़ी मात्रा में वित्तीय और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए, साथ ही धन शोधन और धन के डायवर्जन के अपराध के सबूत वाले दस्तावेज भी जब्त किए। केस में आगे की जांच जारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें