प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर के लड्डू प्रसादम मामले में बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि ईडी ने घी में कथित मिलावट घोटाले की जांच के लिए धन शोधन का मुकदमा दर्ज किया है। यह केस धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया गया है ताकि अवैध तरीके से कमाए गए पैसों की जांच हो सके।
36 लोगों को बनाया गया है आरोपी
अधिकारियों ने बताया कि ईडी इस मामले में सीबीआई की अगुवाई वाली विशेष जांच दल (एसआईटी) के हाल ही में फाइल की गई एफआईआर, दस्तावेज और चार्जशीट को देख रहा है। एसआईटी ने इस मामले में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के नौ अधिकारियों और पांच डेयरी एक्सपर्ट्स समेत 36 लोगों को आरोपी बनाया है।
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एसआईटी की जांच में सामने आया है कि भगवान वेंकटेश्वर मंदिर को घी बताकर जो सामान बेचा गया, वह असल में केमिकल से प्रोसेस किया हुआ पामोलिन तेल और अन्य चीजें थीं। अब ईडी यह पता लगाएगी कि आरोपियों ने मिलावटी घी बेचकर पैसे कैसे कमाया। एजेंसी को शक है कि इसमें हवाला के जरिए पैसों का लेन-देन हुआ है और फंड का गलत इस्तेमाल किया गया है।
क्या है मामला?
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब सितंबर 2024 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि राज्य में पिछली वाईएस जगन मोहन रेड्डी सरकार के समय तिरुपति लड्डू (पवित्र मिठाई) बनाने में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल हुआ था। इससे बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
मामले की हो रही जांच
टीटीडी चेयरमैन बी. आर. नायडू ने जनवरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि पिछली सरकार के दौरान मंदिर को करीब 60 लाख किलो मिलावटी घी सप्लाई हुआ था। इसकी कीमत लगभग 250 करोड़ रुपये बताई गई है। अब ईडी इस पूरे पैसे के लेन-देन की कड़ी जांच कर रही है।
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