प्रवर्तन निदेशालय की ओर से की गई छापेमारियों और दर्ज किए गए मामलों को लेकर बड़ी हकीकत सामने आई है, ईडी द्वारा दर्ज किए गए मामलों में करीब 74 फीसदी सिर्फ फ्रॉड और करप्शन से जुड़े हैं। इन आकंड़े ने ईडी की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि ये भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।
ऐसा माना जा रहा है कि नोटबंदी की वजह से भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में इजाफा हुआ है। पिछले साल दर्ज किए गए केस में ड्रग्स, हथियार तश्करी के मामलों की संख्या काफी कम रही। इनमें 83 फीसदी ऐसे केस हैं जो मनी लॉन्ड्रिंग के हैं, जिनका सीधा संबंध रियल एस्टेट से है। जबकि 7 फीसदी गोल्ड और 10 फीसदी अन्य मामलों से जुड़े केस हैं।
दरअसल, ईडी ने साल 2016 से 2017 के बीच दर्ज किए मामलों पर शोध किया है और इसमें पाया कि फ्रॉड और धोखाधड़ी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़े खतरे की तरह हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक धोखाधड़ी का दायरा सिर्फ देश में तक ही सीमित नहीं है, इसका नेटवर्क देश के बाहर भी फैला हुआ है।
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फ्रॉड का एक तरीका यह है कि बैंकिंग सेक्टर में शेल कंपनियों का उपयोग करके धन प्रेषण किया जाता है। ऐसी गतिविधियों को ही मनी लॉन्ड्रिंग कहा जाता है। ईडी की ओर से धोखाधड़ी को समझाने के लिए एक आईएएस ऑफिसर का उदाहरण दिया गया है। अधिकारी ने चार्टेड अकाउंटेंट की मदद की गई जिसकी करीब 13 शेल कंपनियां हैं, जिनके करीब 446 बेनामी बैंक खाते हैं। ऑफिसर ने 2006 से 2009 के बीच में करीब 39 करोड़ रुपये जमा किए।