कोलकाता में ईडी ने मर्लिन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सात ठिकानों पर छापेमारी की है। कंपनी के प्रमोटरों पर फर्जी दस्तावेजों से जमीन हड़पने और निवेशकों से ठगी करने का आरोप है। जांच में सरकारी जमीन तक के इस्तेमाल की बात सामने आई है। फिलहाल ईडी मामले की पूरी जांच कर रही है।
कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने रियल एस्टेट कंपनी मर्लिन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की टीम एक साथ सात ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। इस कार्रवाई से रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी को शक है कि जमीन हड़पने और निवेशकों से धोखाधड़ी का बड़ा खेल सामने आ सकता है।
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ईडी के मुताबिक कंपनी के प्रमोटर सुशील मोहता और साकेत मोहता समेत अन्य लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीनों पर कब्जा किया। आरोप है कि इन लोगों ने नकली कागज बनाकर जमीन की मालिकाना हक की झूठी कहानी तैयार की। इसके बाद इन जमीनों पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए और खुद को असली मालिक बताकर लोगों से भारी निवेश कराया।
क्या है जमीन घोटाले का पूरा मामला?
जांच में सामने आया है कि जिन जमीनों पर प्रोजेक्ट बनाए गए, उनमें कुछ सरकारी जमीन भी शामिल है। आरोपियों ने फर्जी कागजों के दम पर इन जमीनों को अपने नाम दिखाया और फिर व्यावसायिक प्रोजेक्ट खड़े कर दिए। इससे सरकार और आम लोगों दोनों को नुकसान हुआ है।
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निवेशकों को कैसे बनाया गया शिकार?
ईडी का कहना है कि कंपनी ने खुद को वैध मालिक दिखाकर लोगों का भरोसा जीता। इसके बाद लोगों को बड़े रिटर्न का लालच देकर मोटी रकम निवेश करवाई गई। अब जांच एजेंसी इस पूरे पैसों के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल को खंगाल रही है।