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म्यांमार में नदी के रास्ते सुपारी की तस्करी: फर्जी सीमा शुल्क का खेल, 970 करोड़ का लेनदेन, ED की नौ जगह रेड

Thu, 04 Jun 2026 07:28 PM IST
निर्मल कांत डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ईडी ने म्यांमार से नदी मार्ग से मिजोरम के चम्फाई में सुपारी तस्करी और धनशोधन के मामले में नौ ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों, सीमा शुल्क धोखाधड़ी और स्थानीय दलालों के नेटवर्क के जरिये यह अवैध कारोबार चल रहा था, जिसमें 970 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ। पढ़िए रिपोर्ट-
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ईडी की छापेमारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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म्यांमार में सुपारी की तस्करी और धनशोधन मामले में ईडी ने मिजोरम के चम्फाई में नौ परिसरों पर छापेमारी की है। इस मामले में अपराध की 970 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि शामिल है। म्यांमार में सूखी नदी के रास्ते सुपारी की तस्करी की जाती थी। सीमा पर स्थानीय दलालों को सुपारी की खेप सौंपी जाती थी। स्थानीय दलाल, चम्फाई के गोदामों में तस्करी की गई सुपारी का भंडारण करते थे।  
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आइजोल उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने मिजोरम के चम्फाई में धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17(1) के तहत तलाशी अभियान चलाया। यह तलाशी लालरेम्पारी के आवासीय/व्यावसायिक परिसरों पर की गई। इन परिसरों में लालहनेमी (मालिक, रेम रेम एंड बेकी स्टोर), संगनेहवेला (मालिक, एसएनवी स्टोर), थांगखानमुंगा (मालिक, सीएस स्टोर), रोथुआमलुइया (मालिक, एनएस एंटरप्राइजेज), लालरेम्माविया (मालिक, एसएंडआर हार्डवेयर स्टोर), लालदुआ (मालिक, जेएच फैमिली एंटरप्राइज), जोनुनसांगा (मालिक, मामी स्टोर) और जोसांगपुई शामिल हैं। 

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इंफाल स्थित सीबीआई की भ्रष्टाचार विरोधी शाखा (एसीबी) की ओर से एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। जांच म्यांमार से मिजोरम के चम्फाई के रास्ते भारत में अवैध रूप से लाई जा रही सूखी सुपारी की बड़े पैमाने पर तस्करी के रैकेट से जुड़ी है। यह एफआईआर गुवाहाटी हाईकोर्ट के 16 जुलाई 2024 के एक आदेश के आधार पर दर्ज की गई थी। कोर्ट ने जनहित याचिका संख्या 5/2022 पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। अनुसूचित अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 467 और 471 के अंतर्गत दंडनीय हैं, जो पीएमएलए, 2002 की अनुसूची के भाग ए के अंतर्गत अनुसूचित अपराध हैं।


तियू नदी के रास्ते सूखे सुपारी की तस्करी  
ईडी की जांच में पता चला है कि बर्मी नागरिक जोखावथर और चम्फाई में सीमा शुल्क की मंजूरी के बिना तियू नदी के रास्ते सूखे सुपारी की तस्करी करके भारत में प्रवेश करते थे। सीमा पर स्थानीय दलालों को खेप सौंप देते थे। स्थानीय दलाल चम्फाई के गोदामों में तस्करी की गई सुपारी का भंडारण करते थे। असम-मिजोरम सीमा पर वैरेनगटे तक उसके परिवहन का समन्वय करते थे। इस ऑपरेशन को सिलचर (असम) स्थित व्यापारियों और वित्तपोषकों द्वारा वित्तपोषित किया जाता था, जो बैंकिंग चैनलों के माध्यम से मिजोरम स्थित दलालों के खातों में बड़ी रकम भेजते थे। 

जीएसटी के तहत पंजीकृत नहीं थे बिल  
बर्मी आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान भारतीय मुद्रा में किया जाता था और बाद में सीमा के पास संचालित मुद्रा विनिमयकर्ताओं के माध्यम से इसे बर्मी मुद्रा में परिवर्तित किया जाता था। जांच में आगे पता चला कि 2021-2024 की अवधि के दौरान चम्फाई जिले में सुपारी की आवाजाही के लिए जाली बागान प्रमाण पत्रों और फर्जी सीमा शुल्क निकासी दस्तावेजों का उपयोग करते हुए 251.19 करोड़ रुपये (एसजीएसटी) और 86.25 करोड़ रुपये (सीजीएसटी) के ई-वे बिल धोखाधड़ी से जारी किए गए थे। ये बिल बागान मालिक जीएसटी के तहत पंजीकृत नहीं थे।

2 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम तक कमीशन 
पीएमएलए की धारा 50 के तहत विभिन्न व्यक्तियों से दर्ज किए गए बयानों से यह स्थापित हुआ कि स्थानीय दलालों को खरीद, परिवहन, एस्कॉर्टिंग और सीमा शुल्क से माल की रिहाई से संबंधित गतिविधियों के लिए 2 रुपये से 15 रुपये प्रति किलोग्राम तक कमीशन मिलता था। सीमा शुल्क अधिकारियों के समक्ष स्थानीय व्यक्तियों को बिचौलियों के रूप में पेश करते थे। इसका मकसद, जब्त खेपों की अस्थायी रिहाई सुनिश्चित करना था। इसके लिए प्रति जब्ती सीमा शुल्क रिहाई कार्यवाही के तहत 20 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जाता था। कई जब्ती मामलों में, तस्करी की गई सुपारी को कानूनी रूप से आयातित माल के रूप में दिखाने के लिए सीमा शुल्क अधिकारियों के समक्ष धोखाधड़ी से असंबंधित बिल ऑफ एंट्री प्रस्तुत किए गए थे। 
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970 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ 
आरोपियों के बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला कि अपराध की आय कुल मिलाकर 2 करोड़ रुपये से अधिक थी। 2013 से 2025 की अवधि के दौरान कई खातों के माध्यम से 970 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। तलाशी अभियान के दौरान, आरोपी व्यक्तियों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज अचल संपत्तियों से संबंधित स्वामित्व विलेख और संपत्ति दस्तावेज, व्यावसायिक रिकॉर्ड और मोबाइल फोन सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे आपत्तिजनक दस्तावेज पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत जब्त किए गए हैं।
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