सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख को जमानत देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। ईडी ने उच्च न्यायालय द्वारा देशमुख को दी गई जमानत को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एसआर भट की पीठ के समक्ष ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का उल्लेख किया था।
बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल देशमुख को चार अक्तूबर को जमानत दे दी थी। जमानत एक लाख रुपये के मुचलके पर दी गई थी। हालांकि, यह जमानत ईडी के केस में मिली थी इसलिए वे अभी सीबीआई वाले मामले में फिलहाल जेल में ही हैं।
नवंबर से जेल में हैं बंद
बता दें कि ईडी की जांच के बाद नवंबर, 2021 में देशमुख को गिरफ्तार कर लिया गया था जिसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी ने अनिल देशमुख पर उगाही के आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया था। ईडी के अनुसार देशमुख ने मुंबई के विभिन्न बार और रेस्तरां से करीब 4.7 करोड़ रुपये एकत्र किए। इसके साथ ही आरोप है कि देशमुख ने गलत तरीके से अर्जित धन को नागपुर स्थित श्री साईं शिक्षण संस्थान को मुहैया कराया, जो उनके परिवार के जरिए नियंत्रित एक शैक्षिक ट्रस्ट है।
पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने लगाए थे देशमुख पर उगाही के आरोप
गौरतलब है कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने पिछले साल मार्च में आरोप लगाया था कि देशमुख, जो उस समय राज्य के गृह मंत्री थे, ने पुलिस अधिकारियों को शहर के रेस्तरां और बार से प्रति माह 100 करोड़ रुपये लेने का लक्ष्य दिया था। देशमुख ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई को उनके खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिए जाने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।