ईडी के अनुसार, 9 मई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत मुंबई और सूरत में स्थित चार परिसरों में तलाशी ली गई। यह मामला 'टॉरेस ज्वेलरी' ब्रांड नाम के तहत मेसर्स प्लेटिनम हर्न प्राइवेट लिमिटेड के केस में चल रही जांच का हिस्सा है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुंबई जोनल कार्यालय ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें लोगों से डायमंड एवं अन्य आभूषणों की बिक्री की एवज में पैसा एकत्रित किया गया। मेसर्स प्लेटिनम हर्न प्राइवेट लिमिटेड ने लोगों से एकत्रित किए गए पैसे को तय कारोबार में न लगाकर उसे हवाला में लगा दिया। इतना ही नहीं, नकदी को हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर दिया गया। ईडी ने मुंबई और सूरत में अंगड़िया/हवाला ऑपरेटरों के यहां तलाशी ली। इन ऑपरेटरों ने मुंबई और सूरत में हवाला लेनदेन को सुविधाजनक बनाने में सहायता की थी। ईडी ने ऑपरेटरों के ठिकानों से 6.30 करोड़ रुपये की भारी नकदी के साथ-साथ आपत्तिजनक डिजिटल डिवाइस भी जब्त की है।
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ईडी के अनुसार, 9 मई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत मुंबई और सूरत में स्थित चार परिसरों में तलाशी ली गई। यह मामला 'टॉरेस ज्वेलरी' ब्रांड नाम के तहत मेसर्स प्लेटिनम हर्न प्राइवेट लिमिटेड के केस में चल रही जांच का हिस्सा है। ईडी ने एपीएमसी पुलिस स्टेशन, वाशी, नवी मुंबई द्वारा दर्ज किए गए मामले के आधार पर उक्त जांच शुरू की थी।
ईडी की जांच से पता चला कि मेसर्स प्लेटिनम हर्न प्राइवेट लिमिटेड ने मोइसैनाइट डायमंड और अन्य आभूषणों की बिक्री के बदले अपने ग्राहकों से भारी मात्रा में नकदी एकत्र की है। उक्त नकदी का उपयोग अपने वैध व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए करने के बजाय, नकदी को हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से आगे भेजा गया। बाद में उसे यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर दिया गया। इस मामले में मुख्य व्यक्ति अल्पेश खारा ने न केवल ऑलेक्ज़ेंडर जैपिचेंको उर्फ एलेक्स और ओलेना स्टोयन के निर्देशों पर मुंबई भर में टोरेस शोरूम से भारी मात्रा में नकदी एकत्र करने में मदद की, बल्कि उक्त नकदी को यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदलने में भी उनकी सहायता की। अल्पेश खारा को ईडी ने 26 मार्च को गिरफ्तार किया था। वह एक अप्रैल तक ईडी की हिरासत में रहा था।
जांच के दौरान सामने आया है कि अल्पेश खारा एक प्रसिद्ध अंगड़िया इकाई के फ्रेंचाइजी मालिकों में से एक था, जिसकी पूरे भारत में शाखाएं हैं। अंगड़िया की उन शाखाओं के साथ-साथ अन्य विभिन्न हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से भारी मात्रा में नकदी का आदान-प्रदान किया गया है। ईडी ने मुंबई और सूरत में उन अंगड़िया/हवाला ऑपरेटरों के यहां तलाशी ली, जिन्होंने मुंबई और सूरत में ऐसे हवाला लेनदेन को सुविधाजनक बनाने में सहायता की। इसके परिणामस्वरूप 6.30 करोड़ रुपये की भारी नकदी के साथ-साथ आपत्तिजनक डिजिटल डिवाइस जब्त की गईं। इस मामले में 23 जनवरी के तलाशी अभियान के तहत कुल 21.75 करोड़ रुपये के बैंक खाते फ्रीज किए गए थे। आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए।