फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ED: मणिपुर विश्वविद्यालय के कर्मियों ने ठेकेदार से मिलकर किया ₹74 लाख का गबन, ये है अवैध भुगतान की कहानी

Thu, 09 Oct 2025 03:13 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मणिपुर विश्वविद्यालय में गबन की एक घटना सामने आई है। जहां पर फर्नीचर खरीद में विवि के अधिकारियों और कर्मियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर सरकार को 74 लाख रुपये का चूना लगाया है। 
विज्ञापन
ED - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मणिपुर विश्वविद्यालय में गबन का अनोखा मामला देखने को मिला है। इसमें विश्वविद्यालय के अधिकारी और कर्मियों के अलावा एक ठेकेदार भी शामिल रहा। फर्नीचर खरीद को लेकर आरोपियों ने विश्वविद्यालय को 74 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा दिया। यानी इतनी राशि का गबन कर लिया गया। फर्नीचर आया नहीं, मगर उसका भुगतान कर दिया गया। नतीजा, आरोपियों ने विश्वविद्यालय को भारी नुकसान तो खुद को लाभ पहुंचाया। ईडी ने अब इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारियों की करीब संपत्ति कुर्क की है। इसमें आवासीय संपत्तियां भी शामिल हैं।  

विज्ञापन


प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), इम्फाल उप-क्षेत्रीय कार्यालय के मुताबिक, यह कार्रवाई, धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। इसके तहत कुल 71 लाख रुपये (लगभग) की 3 अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया गया है। उक्त तीन संपत्तियों में से, एक आवासीय संपत्ति कोनसम (ओ) शेत्यबाती देवी पत्नी के. जीवन कुमार सिंह, तत्कालीन वित्त अधिकारी, मणिपुर विश्वविद्यालय के पास है, जिसकी कीमत 23.95 लाख रुपये है। दो कृषि भूमि के टुकड़े लुरेम्बम रामेश्वर मीतेई (ठेकेदार), मेसर्स लुरेम्बम एंटरप्राइजेज के मालिक के पास हैं। इनकी कीमत 48 लाख रुपये है। ये प्रॉपर्टी इम्फाल में है।

ईडी ने सीबीआई, इंफाल की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) द्वारा आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि मणिपुर विश्वविद्यालय के अधिकारी के. बसंत सिंह, के. जीबन कुमार, एन तेजेंद्रो सिंह और एचएनके सरमा (वीसी) और अन्य ने एक दूसरे के साथ और मेसर्स लौरेम्बम एंटरप्राइजेज के मालिक ठेकेदार लौरेम्बम रामेश्वर मीतेई के साथ मिलकर मणिपुर विश्वविद्यालय को धोखा देने के लिए आपराधिक साजिश रची। अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग करके, उन्होंने धोखाधड़ी और बेईमानी से ठेकेदार लौरेम्बम रामेश्वर मीतेई को मणिपुर विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अतिथि गृह (आईजीएच) को विभिन्न फर्नीचर वस्तुओं की आपूर्ति के लिए निविदा देने में अनुचित लाभ पहुंचाया। 
विज्ञापन


इसके अलावा, उन्होंने एमयू के मनोरंजन हॉल में कथित आग की घटना में जले हुए फर्नीचर को छिपाने की कोशिश की। इस तरह मणिपुर विश्वविद्यालय को भारी नुकसान पहुंचा कर खुद को गलत लाभ पहुंचाया। ईडी की जांच से पता चला है कि मणिपुर विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने फर्नीचर वस्तुओं की खरीद के लिए मेसर्स लौरेम्बम एंटरप्राइजेज को उचित प्रक्रियाओं/ मानदंडों का पालन किए बिना और जीएफआर नियमों के नियम 148 का घोर उल्लंघन करते हुए निविदाएं प्रदान कीं। 

ये भी पढ़ें: Politics: 'प्रधानमंत्री ने जो बातें मुझपर थोपीं, वो पूरी तरह गलत'; जानें पीएम मोदी पर क्यों हमलावर हुए चिदंबरम

जांच में यह भी सामने आया है कि इसके अलावा मेसर्स लौरेम्बम एंटरप्राइजेज के मालिक एल. रामेश्वर मीतेई ने आपूर्ति आदेश के अनुसार 64,36,502/- रुपये के फर्नीचर वस्तुओं की आपूर्ति नहीं की। अवैध रूप से उपरोक्त राशि के बिल बनाए और 9,65,476/- रुपये का स्थापना शुल्क भी दावा किया। इस प्रकार, मणिपुर विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा एल रामेश्वर मीतेई को अवैध रूप से कुल 74,01,978/- रुपये का भुगतान किया गया। अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप मणिपुर विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके एल. रामेश्वर मीतेई द्वारा 74,01,978/- रुपये की राशि का गबन किया गया। ईडी के अनुसार, यह 74,01,978 रुपये, अपराध की आय के अलावा कुछ नहीं हैं।

विज्ञापन

ED - फोटो : ANI
ED: भूटान से कैसे भारत के इन प्रदेशों में पहुंची 16 गाड़ियां, सीमा शुल्क नहीं दिया, यूं पकड़ा 'इमरान खान और बाशा' का खेल   

भूटान से 16 गाड़ियां, भारत के कई प्रदेशों में पहुंच जाती हैं। ये सभी वाहन बॉर्डर के रास्ते ही आए हैं। हैरानी की बात ये है कि ये वाहन, बिना सीमा शुल्क जमा कराए ही भारत में पहुंचे हैं। 'इमरान खान और बाशा' ने जाली अनापत्ति प्रमाणपत्रों का उपयोग करके भूटान से पुराने वाहन खरीदे थे। इनका भुगतान भी अनधिकृत माध्यमों से किया गया। वाहनों को खोलकर केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में स्पेयर पार्ट्स के रूप में बेचा गया। ये सब इसलिए किया गया, क्योंकि सभी गाड़ियां अवैध तरीके से भारत में लाई गई थी। 

इस मामले का खुलासा करने के लिए ईडी ने एक खास ऑपरेशन शुरु किया। एक ऐसे नेटवर्क का पता लगाया गया, जो सीमा शुल्क से बचने और अनौपचारिक चैनलों के माध्यम से विदेशी मुद्रा स्थानांतरित करने के लिए  सीमा के सीक्रेट स्थान का इस्तेमाल करता था। इसके अलावा वह डिजिटल प्लेटफार्मों का फायदा भी उठाता था। ईडी ने हवाला लेनदेन, विदेशी मुद्रा उल्लंघन और भारत की वित्तीय प्रणाली को कमजोर करने वाले सीमा पार तस्करी नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोच्चि क्षेत्रीय कार्यालय ने 8 अक्तूबर को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के तहत केरल और तमिलनाडु में 17 परिसरों में छापेमारी की है। यह छापेमारी उच्च-स्तरीय विदेशी वाहनों के अवैध आयात और संबंधित अनधिकृत विदेशी मुद्रा लेनदेन से जुड़े एक मामले के संबंध में की गई। प्रारंभिक जानकारी में मेसर्स शाइन मोटर्स के साझेदारों, साथिक बाशा और इमरान खान के नेतृत्व वाले कोयंबटूर स्थित एक नेटवर्क की पहचान की गई है। दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर जाली अनापत्ति प्रमाणपत्रों का उपयोग करके भूटान से पुराने वाहन खरीदे और इसके लिए अनधिकृत माध्यमों से भुगतान किया गया। 

एर्नाकुलम, त्रिशूर, कोझीकोड, मलप्पुरम, कोट्टायम और कोयंबटूर में 17 स्थानों - आवासों, कार्यशालाओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और चेन्नई में एक पते पर एक साथ तलाशी ली गई। तलाशी कार्रवाई के दौरान, आपत्तिजनक दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाहन के कागजात और भुगतान रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। तलाशी के दौरान, सथिक बाशा और इमरान खान ने फेमा की धारा 37 के तहत बयान दिए, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि 2023-24 के बीच उन्होंने भूटान से एक भूटानी मध्यस्थ, श्री शा किनले, एक पूर्व-सेना कर्मी के माध्यम से लगभग 16 वाहन खरीदे। 
इन वाहनों को जयगांव में भारत-भूटान सीमा तक ले जाया गया। कार-वाहकों पर लोड किया गया। सीमा शुल्क अदा किए बिना ही वाहनों को कोलकाता, भुवनेश्वर और चेन्नई के रास्ते कोयंबटूर ले जाया गया। कोई आयात शुल्क नहीं दिया गया। वाहनों को खोलकर केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में स्पेयर पार्ट्स के रूप में बेचा गया, उनकी किसी भी फर्म के पास आयात-निर्यात कोड नहीं था या वैधानिक चालान नहीं थे। 

केरल भर में गैरेज और कार्यशालाओं की तलाशी में विघटित वाहन भागों और भूटान स्थित आपूर्तिकर्ताओं के साथ संचार के डिजिटल साक्ष्य की उपस्थिति की पुष्टि हुई।  जब्त की गई सामग्री में जाली एनओसी, व्हाट्सएप चैट, बैंक विवरण और खरीदार सूचियां शामिल हैं। जांच में अनधिकृत विदेशी मुद्रा लेनदेन और विदेशी संपत्तियों के अधिग्रहण से संबंधित फेमा, 1999 की धारा 3, 4 और 8 के प्रथम दृष्टया उल्लंघन का पता चला है। जब्त किए गए रिकॉर्ड का फोरेंसिक रूप से विश्लेषण किया जा रहा है ताकि धन के निशान का पता लगाया जा सके। विदेशी खातों की संलिप्तता की पुष्टि की जा सके। ईडी सत्यापन और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क, राज्य आरटीओ और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें