प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) में घी में मिलावट के मामले में, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत कैलाश चंद मंगला को गिरफ़्तार किया है। उन्हें विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) के सामने पेश किया गया। अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
ईडी ने तिरुपति ईस्ट पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की थी। इस एफ़आईआर में टीटीडी को मिलावटी घी की धोखाधड़ी से सप्लाई करने के मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाज़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। जांच से पता चला है कि मिलावटी घी बनाने के लिए कथित तौर पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नल ऑयल, पामोलीन और एमजी -90, मोनोग्लिसराइड्स, मायवासेट सॉफ्ट 400 और एसिटिक एसिड एस्टर जैसे कई केमिकल का इस्तेमाल किया गया था।
इसके बाद इसे टीटीडी को सप्लाई करने के लिए 'एगमार्क स्पेशल ग्रेड गाय का घी' बताकर भेजा गया। 2019-2024 के दौरान टीटीडी को किए गए इस कथित धोखाधड़ी वाले घी की सप्लाई की कीमत लगभग ₹230 करोड़ थी। इसमें से लगभग ₹96 करोड़ का मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला ने बनाया था।
सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला इस मामले में साजिश में शामिल लोगों में से एक हैं। उन्होंने मिलावट के लिए सामान खरीदने और अपनी फैक्ट्री में मिलावटी घी बनाने में मदद की। उन्होंने कई फ्रंट कंपनियों, जैसे वैष्णवी डेयरी स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड, मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और एआर डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिए मिलावटी घी की सप्लाई का काम भी संभाला।
जांच में यह भी पता चला है कि कैलाश चंद मंगला ने घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े झूठे रिकॉर्ड बनाए थे। ऐसा उन्होंने मिलावटी चीज़ों के असली इस्तेमाल को छिपाने और असली गाय के घी के सही उत्पादन और सप्लाई का दिखावा करने के मकसद से किया। इससे पहले, ईडी ने भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर और डायरेक्टर विपिन जैन को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने ही टीटीडी को मिलावटी घी बनाने और धोखाधड़ी से सप्लाई करने की साज़िश रची थी।