ईडी ने सीबीआई-एसीबी द्वारा विभिन्न धाराओं आरपीसी, 1989 और जेके पीसी एक्ट, 2006 के तहत जम्मू-कश्मीर ग्रामीण बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक इश्तियाक अहमद पर्रे और अन्य के खिलाफ दर्ज चार एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), श्रीनगर क्षेत्रीय कार्यालय ने गत सप्ताह जेएंडके में स्थित 'जम्मू और कश्मीर ग्रामीण बैंक' धोखाधड़ी के मामले में इश्तियाक अहमद पर्रे और 12 अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत विशेष न्यायालय (पीएमएलए), श्रीनगर के समक्ष अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है। विशेष न्यायालय ने उसी दिन यानी 12 मार्च को पीसी का संज्ञान लिया है। इस केस में जम्मू कश्मीर ग्रामीण बैंक के एक ब्रांच मैनेजर ने अपने ड्राइवर व अन्य लोगों के साथ मिलकर 6.30 करोड़ रुपये का गबन कर दिया। बाद में उस राशि के जरिए इश्तियाक अहमद पर्रे और उनके परिवार के सदस्यों/करीबी रिश्तेदारों ने अचल संपत्ति बनाने का काम किया।
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बता दें कि ईडी ने सीबीआई-एसीबी द्वारा विभिन्न धाराओं आरपीसी, 1989 और जेके पीसी एक्ट, 2006 के तहत जम्मू-कश्मीर ग्रामीण बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक इश्तियाक अहमद पर्रे और अन्य के खिलाफ दर्ज चार एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इस्तियाक अहमद पर्रे द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड/संयुक्त देयता समूह ऋण/वाहन ऋण/नकद क्रेडिट सीमा/आसान वित्त ऋण, ऐसे लगभग 250 ऋण खातों को मंजूरी दी गई। यह पता करने का प्रयास ही नहीं किया गया कि ये खाता धारक मौजूद हैं या नहीं। वे असली हैं या नकली। जानकारी एकत्रित किए बिना ही 6.30 करोड़ रुपये की राशि प्रदान कर दी गई। आरोपी इश्तियाक अहमद पर्रे, जम्मू-कश्मीर ग्रामीण बैंक की विभिन्न शाखाओं में तत्कालीन शाखा प्रमुख रहा था। उसने अपनी इस पॉजिशन का फायदा उठाया। अपने ड्राइवर मोहम्मद मकबूल घानी और अन्य के साथ आपराधिक साजिश में शामिल होकर 6.30 करोड़ रुपये के धन का गबन किया।
ईडी की जांच से पता चला है कि ऋण की राशि का बड़ा हिस्सा गबन कर लिया गया था। इसका उपयोग इश्तियाक अहमद पर्रे और उनके परिवार के सदस्यों/करीबी रिश्तेदारों ने अचल संपत्ति बनाने, अपनी पैतृक संपत्तियों के नवीनीकरण/संशोधन, अपनी बेटियों की शानदार शादी और विलासितापूर्ण जीवन जीने में किया था। इस मामले में पहले, ईडी ने 29/07/2024 को इश्तियाक अहमद पर्रे और उनके सहयोगियों से संबंधित केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में विभिन्न स्थानों पर तलाशी की थी। इसके परिणामस्वरूप विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए थे। ईडी द्वारा मामले की विस्तार से जांच की गई। जांच के बाद, अक्टूबर, 2024 में, ईडी ने श्रीनगर और श्रीनगर के आस-पास के स्थानों पर स्थित इस्तियाक अहमद पर्रे और अन्य की 3.40 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां कुर्क की थी।