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ED: आईएएस-आईपीएस अफसरों की आवासीय सोसायटी में हो गई धोखाधड़ी, जमीन के लेनदेन में 3.10 करोड़ रुपये का गबन

Tue, 23 Sep 2025 04:00 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने असम में अखिल भारतीय सेवा अधिकारी सहकारी समूह आवास सोसायटी भूमि धोखाधड़ी मामले में 94.22 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क की है।  यह कुर्की अखिल भारतीय सेवा अधिकारी सहकारी समूह आवास सोसायटी, गुवाहाटी, असम से जुड़े एक भूमि धोखाधड़ी से जुड़ी है, जिसके सदस्य आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारी हैं।
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पीएसीएल मामले में ईडी ने 762 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की - फोटो : ANI
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विस्तार
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आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों की आवास सोसायटी में धोखाधड़ी हो गई। सोसायटी में जमीन के लेनदेन को लेकर 3.10 करोड़ रुपये का गबन हो गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने असम में अखिल भारतीय सेवा अधिकारी सहकारी समूह आवास सोसायटी भूमि धोखाधड़ी मामले में 94.22 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क की है। जांच एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 18/9/2025 को राजेंद्र नाथ की 94.22 लाख रुपये मूल्य की आठ अचल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया है। 

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ईडी के मुताबिक, यह कुर्की अखिल भारतीय सेवा अधिकारी सहकारी समूह आवास सोसायटी, गुवाहाटी, असम से जुड़े एक भूमि धोखाधड़ी से जुड़ी है, जिसके सदस्य आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारी हैं। इस मामले में, ईडी ने हाल ही में सौतिक गोस्वामी और राजेंद्र नाथ के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की है, जिसका न्यायालय द्वारा अभी तक संज्ञान नहीं लिया गया है।

ईडी ने गुवाहाटी के बसिष्ठ पुलिस स्टेशन में सौतिक गोस्वामी, राजेंद्र नाथ और अन्य के खिलाफ दर्ज एक एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। एफआईआर में आईएएस/आईपीएस/आईएफएस अधिकारियों के लिए एक आवासीय कॉलोनी विकसित करने के लिए हुए एक जमीन सौदे के संबंध में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाया गया है। 
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एफआईआर के अनुसार, ऑफिसर्स सोसाइटी ने 86 बीघा जमीन हासिल करने के लिए सौतिक गोस्वामी को 3.60 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया था। हालांकि, जमीन कभी नहीं सौंपी गई और सोसाइटी को केवल 50 लाख रुपये ही वापस किए गए। शेष 3.10 करोड़ रुपये का गबन किया गया। इसे अपराध की आय (पीओसी) के रूप में पहचाना गया।

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ईडी की जांच से पता चला है कि सौतिक गोस्वामी ने सोसाइटी के लिए जमीन खरीदने के लिए राजेंद्र नाथ के साथ एक निजी समझौता किया था। राजेंद्र नाथ को भारी मात्रा में नकद भुगतान किया गया था, जिसकी पुष्टि जब्त की गई रसीदों और पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों से होती है।

जांच में यह भी पता चला कि उक्त धोखाधड़ी को जारी रखने के बाद, राजेंद्र नाथ ने 2016 और 2023 के बीच कई संपत्तियां अर्जित कीं, जिन्हें किसी भी वैध आय से अर्जित नहीं माना जा सकता। जब्त की गई पीओसी में असम के कुकुरमारा, जोगीपारा, बरहंती मनियारी, बंगारा, कवाईमारी और रामपुर गांवों में जमीन के भूखंड शामिल हैं।

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ED: संपत्तियों के अवैध अधिग्रहण गिरोह का सरगना 'माइकल' गिरफ्तार, उत्तराधिकारी बनाने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र में हेराफेरी    
 
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पणजी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 22.09.2025 को मोहम्मद सुहैल उर्फ माइकल को गिरफ्तार किया है। गोवा में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से जमीन हड़पने वाले सिंडिकेट के कथित मास्टरमाइंड मोहम्मद सुहैल को कोलवले सुधार गृह से गिरफ्तार किया गया, जहां वह पहले से ही एक अन्य अनुसूचित अपराध के सिलसिले में न्यायिक हिरासत में बंद था। उसे विशेष न्यायालय (पीएमएलए), मर्सेस के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे चार दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है।

ईडी ने एफआईआर और उसके बाद विशेष जांच दल (एसआईटी-भूमि हड़पना), गोवा पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की थी। मोहम्मद सुहैल, उनकी पत्नी अंजुम शेख और एक सहयोगी नूर फैजल भटकर के खिलाफ आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी और जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने जैसे अपराधों के लिए पुलिस मामला दर्ज किया गया था।
ईडी की जांच से पता चला है कि मोहम्मद सुहैल गोवा में कई संपत्तियों के अवैध अधिग्रहण में शामिल एक गिरोह का सरगना था। यह जांच एक शिकायत पर आधारित है, जिसमें मोहम्मद सुहैल और उसके साथियों ने कथित तौर पर एक फर्जी कानूनी उत्तराधिकारी बनाने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र में हेराफेरी की। फिर उन्होंने अंजुना में एक संपत्ति अवैध रूप से हासिल करने के लिए धोखाधड़ी से उत्तराधिकार विलेख तैयार किया, जिसे बाद में 50 लाख रुपये में बेच दिया गया, जिससे अपराध से प्राप्त आय (पीओसी) अर्जित हुई।

पीएमएलए के तहत ईडी की जांच ने एक गहरी साजिश और एक सुसंगत कार्यप्रणाली को उजागर किया है। मोहम्मद सुहैल अपने सहयोगियों के साथ मिलीभगत करके खाली संपत्तियों की पहचान करता, दस्तावेजों में जालसाजी करता और फर्जी स्वामित्व इतिहास बनाने के लिए सरकारी विभागों के रिकॉर्ड में हेरफेर करता। फिर इन संपत्तियों को अवैध रूप से अपने सहयोगियों के नाम पर बदल कर बेच दिया गया। संबंधित मामले में, जिसमें मोहम्मद सुहैल मुख्य आरोपी है, ईडी पहले ही लगभग 232.73 करोड़ रुपये मूल्य की 52 अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त कर चुका है।

मोहम्मद सुहैल और 35 अन्य के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की है। उस जांच के दौरान, मोहम्मद सुहैल ने खुद 100 से अधिक संपत्तियों के अवैध अधिग्रहण में अपनी संलिप्तता का खुलासा किया था। ईडी के अनुसार, आरोपी माइकल की गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिससे ईडी को उनसे पूछताछ करके धन के स्रोत का पता लगाने, पीओसी के अंतिम उपयोग की पहचान करने और इस व्यापक घोटाले में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता का पता लगाने में मदद मिलेगी।
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