गुजरात कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता और उनके परिवार की 36.12 करोड़ रुपये की संपत्ति प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जब्त की है। यह जानकारी ईडी ने बृहस्पतिवार को दी।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1985 बैच के अधिकारी संजय गुप्ता ने वर्ष 2002 में नौकरी छोड़ दी थी और बाद में नीसा ग्रुप ऑफ कंपनीज नाम से अपना आतिथ्य सत्कार (हॉस्पिटेलिटी) बिजनेस शुरू किया था। उनके खिलाफ ईडी का मामला कथित आपराधिक कदाचार और ‘मेट्रो लिंक एक्सप्रेस फॉर गांधीनगर एंड अहमदाबाद कंपनी लिमिटेड (एमईजीए) के कोष के गबन का है। गुप्ता अप्रैल 2011 से अगस्त 2013 के बीच एमईजीए के अध्यक्ष थे।
ईडी ने एक बयान में कहा कि जांच के दौरान पाया गया कि गुप्ता ने एमईजीए का अध्यक्ष रहने के दौरान मनमाने तरीके से अपने करीबी सहयोगियों को विभिन्न आधिकारिक पदों पर नियुक्त किया। ईडी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने इन कर्मचारियों को निदेशक बताते हुए उनके साथ कई फर्जी कंपनियां खड़ी कीं और 2012-13 के दौरान बैंक खाते खोले।
ईडी ने गुप्ता, पत्नी नीलू के साथ-साथ नीसा ग्रुप कंपनीज के नाम पर मौजूद संपत्तियों जैसे नीसा लिजर लिमिटेड, नीसा टेक्नोलॉजी, नीसा एग्रीटेक एंड फूड्स लिमिटेड को जब्त करने का अस्थायी आदेश जारी किया था। जब्त की गई संपत्तियों में अहमदाबाद के सेटेलाइट इलाके में धनंजय टॉवर स्थित फ्लैटों, इसी इलाके में स्थित कुछ अन्य अचल संपत्ति, जोधपुर में कसेला टॉवर, अहमदाबाद में थलतेज स्थित कैंबे होटल और अहमदाबाद में विसालपुर, चंगोदर और दस्करोई स्थित प्लाट और फैक्टरियां शामिल हैं।
एजेंसी का आरोप है कि इस मामले में शामिल काल्पनिक कंपनियों ने माल या सेवाओं की आपूर्ति किए बगैर एमईजीए से फर्जी बिलों का भुगतान लिया। इन बिलों का सत्यापन अवैध रूप से भर्ती किए गए अधिकारियों ने किया। भुगतान को अंतिम मंजूरी गुप्ता ने दी क्योंकि उनके पास प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियां थी। ईडी ने राज्य पुलिस की सीआईडी की प्राथमिकी पर संज्ञान लेते हुए यह मामला अपने हाथ में लिया। गुप्ता को सीआईडी ने मेट्रो लिंक प्रोजेक्ट में 113 करोड़ रुपये के गबन मामले में 2015 में गिरफ्तार भी किया था।