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ED: गोपनीय प्रश्न पत्र लीक किए, OMR शीट के साथ छेड़छाड़ की; पेपर के बदले उम्मीदवारों से वसूली गई मोटी रकम

Sat, 01 Aug 2026 05:32 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
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ईडी और यूकेएसएसएससी। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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ईडी देहरादून ने यूकेएसएसएससी परीक्षा पेपर लीक घोटाले के सिलसिले में 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के प्रावधानों के तहत 63.30 लाख रुपये की चल और अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया है। आरोपियों ने यूकेएसएसएससी के गोपनीय प्रश्न पत्र लीक किए। यहां तक कि ओएमआर शीट के साथ भी छेड़छाड़ की गई। पेपर के बदले उम्मीदवारों से मोटी रकम वसूली गई। 
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संगठित गिरोह ने किए गोपनीय प्रश्न पत्र लीक 
ईडी ने देहरादून के रायपुर पुलिस स्टेशन में यूकेएसएसएससी ग्रेजुएट लेवल (वीडीओ/वीपीडीओ) परीक्षा, 2021 के पेपर लीक होने के मामले में दर्ज एफआईआर और देहरादून के विजिलेंस सेक्टर में वीडीओ/वीपीडीओ परीक्षा, 2016 में गड़बड़ियों से जुड़ी एफआईआर के आधार इस मामले की जांच शुरू की है। जांच में पता चला कि हाकम सिंह रावत, टेक्नो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (परीक्षा के लिए प्रिंटिंग एजेंसी) के कर्मचारियों, सरकारी अधिकारियों, बिचौलियों और मदद करने वालों के एक संगठित गिरोह ने बेईमानी से गोपनीय प्रश्न पत्र लीक किए। परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर की। उम्मीदवारों से भारी रकम वसूली। लीक हुए पेपर बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए उम्मीदवारों को मोटी रकम के बदले बांटे गए। अपराध से हुई कमाई का इस्तेमाल चल और अचल संपत्ति खरीदने में किया गया। 

उम्मीदवारों से लिए 95 लाख रुपये 
हाकम सिंह रावत ने उम्मीदवारों से लगभग 95 लाख रुपये लिए थे। आरोपी ने यूकेएसएसएससी परीक्षा का पेपर लीक करके हुई गैर-कानूनी कमाई को जायज आय के तौर पर दिखाने की कोशिश की थी। उनके बैंक अकाउंट्स की जांच से पता चला कि उनमें काफी मात्रा में कैश जमा किया गया था, जो उनकी बताई गई आय के स्रोतों से मेल नहीं खाता था। उनके इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) की और जांच करने पर पता चला कि उन्होंने खेती से आय दिखाई थी, जो असल में की गई खेती के काम के मुकाबले बहुत ज़्यादा थी। इसका इस्तेमाल बिना हिसाब-किताब वाले कैश जमा को सही ठहराने के लिए किया गया था। 
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आईटीआर में दी गलत जानकारी 
जांच से यह साबित हुआ कि लीक हुए प्रश्न पत्रों को व्यवस्थित तरीके से बेचकर कमाए गए पैसे (अपराध से हुई कमाई) को कैश जमा करके, आईटीआर में गलत जानकारी देकर और खेती से आय का दावा करके फाइनेंशियल सिस्टम में मिलाया गया था। परीक्षा के समय के दौरान, हाकम सिंह रावत ने चल और अचल संपत्तियां बनाईं, जिन्हें अब अस्थायी रूप से जब्त कर लिया गया है। पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों, बैंक अकाउंट के विश्लेषण और 14 जगहों पर की गई तलाशी से घोटाले से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस, प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड और कैश मिला है। इनसे हाकम सिंह रावत की भूमिका साफ तौर पर साबित होती है। उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम द्वारा दायर कई चार्ज-शीट में भी इस संगठित रैकेट में हाकम सिंह रावत और उनके साथियों की भूमिका साबित हुई है।

भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी 
ईडी ने देहरादून की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारियों, सरकारी कर्मचारियों, बिचौलियों और मदद करने वालों समेत कई आरोपियों के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (मुकदमा चलाने की शिकायत) दायर की है। यूकेएसएसएससी परीक्षा घोटाले में 2016 और 2021 में आयोजित भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी। उत्तराखंड पुलिस और विजिलेंस सेक्टर द्वारा दर्ज एफआईआर से पता चला कि ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ की गई। गोपनीय पेपर लीक किए गए और उम्मीदवारों की धोखाधड़ी से मदद की गई। इस संगठित साज़िश के कारण आरोपियों को गलत तरीके से फायदा हुआ। भर्ती प्रक्रिया की ईमानदारी को गैर-कानूनी नुकसान पहुंचा।
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