ईडी (ED) के मुताबिक, साल 2011 से 2016 के बीच 350 मेडिकल छात्रों (Medical Student) से ली गई रकम का इस्तेमाल आरोपियों ने संपत्तियां खरीदने या निजी इस्तेमाल के लिए किया। एससीएसईएस ने भारतीय चिकित्सा परिषद (IMC) की मंजूरी नहीं होने के बावजूद दाखिला देने के नाम पर पैसे वसूल किए।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में स्पेशल कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया है जिसमें दावा किया गया है कि कोल्हापुर की श्री छत्रपति एजुकेशन सोसायटी (SCSES) के पूर्व अध्यक्ष महादेव देशमुख (Mahadev Deshmukh) और अन्य आरोपियों ने ट्रस्ट के कॉलेज में दाखिला देने के नाम पर मेडिकल छात्रों को 65 करोड़ रुपये की चपत लगाई।
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ईडी के मुताबिक, साल 2011 से 2016 के बीच 350 मेडिकल छात्रों से ली गई रकम का इस्तेमाल आरोपियों ने संपत्तियां खरीदने या निजी इस्तेमाल के लिए किया।
एजेंसी ने आरोपपत्र में आरोप लगाया कि एससीएसईएस ने भारतीय चिकित्सा परिषद (IMC) की मंजूरी नहीं होने के बावजूद दाखिला देने के नाम पर पैसे वसूल किए।
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इस मामले में ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष महादेव देशमुख और तत्कालीन सचिव उनके भाई अप्पासाहेब गिरफ्तार हो चुके हैं। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
ईडी ने कहा कि इन लोगों ने न तो छात्रों को दाखिला दिलाया और न ही उनके पैसे लौटाए। इन लोगों ने सारे पैसे नकद लिए और इसे अस्पताल से हुई कमाई के रूप में दिखाया। इस रकम को सोसायटी और कॉलेजों के सात बैंक खातों में रखा गया।