बिहार के मुंगेर जिले में एक ऐसा 'डिजिटल जॉब/निवेश घोटाला' सामने आया है, जिसमें लोगों से पहले तय राशि का निवेश कराया जाता और फिर उन्हें 30 दिन में 4800 ऑडियो/वीडियो देखने के लिए कहा जाता। वे एक माह में अगर सभी वीडियो देख लेते तो उन्हें 15 हजार रुपये दिए जाते। एक दो बार तो यह शर्त ठीक साबित हुई, लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि एक महीने में 48 सौ वीडियो देखना असंभव सा हो गया। वजह, जानबूझकर वेबसाइट को धीमा कर दिया गया। नतीजा, लोगों का निवेश डूबने लगा और शर्त पूरी न होने के कारण डिजिटल जॉब भी हाथ से चली गई।
किनती जगहों पर चला तलाशी अभियान?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पटना जोनल ऑफिस ने गुरुवार को बिहार के मुंगेर जिले में पांच जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत जॉलीवुड म्यूज़िक इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड और डीएलएमएस जॉलीवुड म्यूज़िक प्राइवेट लिमिटेड (मुंगेर, बिहार) द्वारा किए गए इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के सिलसिले में की गई। इन कंपनियों को मुंगेर (बिहार) के एक परिवार द्वारा कंट्रोल किया जाता है, जिसके मुखिया जितेंद्र कुमार राजीव और उनके सहयोगी हैं।
इन्वेस्टर्स को लुभाने के लिए कौन से वादे किए?
इस घोटाले में लोगों को 'डिजिटल जॉब' और इन्वेस्टमेंट को दोगुना करने का लालच दिया गया। संभावित इन्वेस्टर्स को लुभाने के लिए कहा गया कि वे 256500 रुपये निवेश करें। उसके बाद कंपनी की वेबसाइट पर हर महीने 4800 ऑडियो/वीडियो देखें। अगर वे ऐसा करते हैं तो उन्हें हर महीने 15000 रुपये दिए जाएंगे। साथ ही उनसे ज्यादा एंगेजमेंट के लिए अतिरिक्त बोनस देने का वादा भी किया गया। कंपनी ने नए इन्वेस्टर्स को लाने पर अतिरिक्त पैसे देने और ज़्यादा लोगों को लाने वालों को बाइक और कार देने का वादा भी किया।
जानबूझकर वेबसाइट को कैसे धीमा किया?
हालांकि, इन्वेस्टमेंट इकट्ठा करने के बाद, कंपनी के सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने जानबूझकर वेबसाइट को धीमा कर दिया। इससे यूज़र्स के लिए हर महीने 4800 ऑडियो/वीडियो देखने का ज़रूरी काम पूरा करना तकनीकी रूप से असंभव हो गया। इस जानबूझकर की गई गड़बड़ी के कारण इन्वेस्टर्स पेमेंट पाने के लिए ज़रूरी शर्तें पूरी नहीं कर पाए। इस स्कीम में कुल इन्वेस्टमेंट लगभग 11.67 करोड़ रुपये था। इन्वेस्टर्स से कहा गया कि वे इन्वेस्टमेंट के लिए दी गई दो मुख्य स्लैब में से किसी एक में इन्वेस्ट करके "सिक्योरिटी मनी" जमा करें।
क्या निवेश के पैसे को दूसरी जगहों पर भेजा?
ईडी ने बीएनएस, 2023 की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज केस के आधार पर जितेंद्र कुमार राजीव, धीरज कुमार और अन्य लोगों के खिलाफ जांच शुरू की। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने जमालपुर, मुंगेर और आस-पास के इलाकों में लोगों को डिजिटल जॉब और निवेश को दोगुना करने का लालच दिया था। इसके बाद, ईडी ने 2025 में इस मामले की जांच अपने हाथ में ली। जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने जो निवेश हासिल किया था, उसे दूसरी जगहों पर भेज दिया गया और उससे कई अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
रेड में कौन-कौन से अहम दस्तावेज बरामद किए गए?
इसी क्रम में, डायरेक्टर्स, टेक्निकल/सॉफ्टवेयर एक्सपर्ट्स, गायकों और अन्य लोगों के घरों पर तलाशी अभियान चलाए गए। इन लोगों ने गरीब निवेशकों को ज़्यादा रिटर्न का लालच देकर उनसे निवेश हासिल किया था। तलाशी अभियान के दौरान अचल संपत्ति, बैंक अकाउंट की जानकारी, एग्रीमेंट, निवेश की जानकारी और निवेशकों की लिस्ट जैसे कई अहम दस्तावेज़ बरामद और ज़ब्त किए गए। पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई के लिए इन दस्तावेजो की जांच-पड़ताल की जा रही है।