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FCRA संशोधन बिल: 12 अगस्त को संसद में बहस, पुराने नियमों में बदलाव नहीं; शाह और मिजोरम के CM में क्या हुई बात?

Thu, 06 Aug 2026 08:35 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

एफसीआरए बिल को लेकर उपजी भारी चिंताओं के बीच केंद्र सरकार का यह आश्वासन बहुत राहत देने वाला है। कानून को पिछली तारीख से लागू न करने के फैसले से देश भर के जनकल्याणकारी संस्थानों का भविष्य सुरक्षित रहेगा। अब सभी की निगाहें 12 अगस्त को संसद में होने वाली इस महत्वपूर्ण चर्चा पर टिकी हुई हैं।
 
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लालदुहोमा, सीएम मिजोरम - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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संसद में बहुचर्चित विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 पर आगामी 12 अगस्त को विस्तार से चर्चा होगी। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद यह अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि गृह मंत्री ने एक बड़ा आश्वासन दिया है। नया कानून पिछली तारीख यानी भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं होगा। इस फैसले से देश के तमाम सामाजिक, जनकल्याणकारी और धार्मिक संगठनों को बहुत बड़ी राहत मिली है।
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गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद मिजोरम के मुख्यमंत्री ने क्या बताया?
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस मुलाकात की पूरी जानकारी दी। वह मिजोरम के प्रमुख चर्च नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गृह मंत्री से मिलने पहुंचे थे। प्रतिनिधिमंडल ने नए बिल के सख्त प्रावधानों को लेकर अपनी चिंताएं जताई थीं। गृह मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को बहुत ध्यान से सुना। अमित शाह ने कहा कि विधेयक पर 12 अगस्त को सदन में बहस होगी और इसे पारित कराया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिया कि किसी भी संगठन पर पुराने मामलों को लेकर कार्रवाई नहीं होगी। यह कानून केवल आगे की तारीखों से लागू होगा।

एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 की पांच बड़ी बातें
  • 12 अगस्त को संसद में चर्चा: गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि इस बिल पर 12 अगस्त को संसद में बहस होगी। यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था।
  • पिछली तारीख से लागू नहीं: नया कानून भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा। इससे वर्षों से चल रहे पुराने सेवा संस्थानों की संपत्तियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।
  • नामित प्राधिकरण का गठन: विदेशी धन और उससे बनी संपत्तियों की देखरेख व प्रबंधन के लिए एक नया 'नामित प्राधिकरण' बनाया जाएगा।
  • संपत्ति का अस्थायी नियंत्रण: धारा 14, 14A और 14B के तहत लाइसेंस रद्द होने, सरेंडर करने या समाप्त होने पर संपत्ति अस्थायी रूप से सरकार के अधीन चली जाएगी।
  • स्थायी हस्तांतरण का नियम: यदि कोई संस्थान तय समय में नया प्रमाण पत्र नहीं लेता या नवीनीकरण नहीं कराता, तो उसकी संपत्ति हमेशा के लिए सरकार के प्राधिकरण में निहित हो जाएगी।
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नए बिल के किन सख्त नियमों को लेकर देश भर में उठ रहे थे सवाल?
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में बदलाव के लिए यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य विदेशी फंडिंग पाने वाली गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) पर सरकारी निगरानी को ज्यादा मजबूत बनाना है।

विधेयक के नियमों के अनुसार, अगर किसी संस्था का लाइसेंस समाप्त होता है, तो उसकी संपत्ति सरकार के पास चली जाएगी। धारा 14 के तहत लाइसेंस रद्द होने, धारा 14A के तहत सरेंडर करने या धारा 14B के तहत लाइसेंस समाप्त होने पर संपत्ति पर सरकार का कब्जा हो जाएगा। सामाजिक संगठनों को डर था कि अगर यह नियम पुरानी तारीखों से लागू हुआ, तो वर्षों से बने स्कूल, अस्पताल और अनाथालय बंद हो जाएंगे। इससे जनसेवा का काम बुरी तरह प्रभावित हो सकता था।

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चर्च प्रतिनिधियों ने गृह मंत्री को सौंपे ज्ञापन में क्या मांगें रखीं?
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा के साथ 'मिजोरम कोहरान ह्रैतु कमेटी' के अध्यक्ष जॉन राल्डोसंगा और 'काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिजोरम' के महासचिव लालहमांगाइहा ने गृह मंत्री को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा। यह समिति मिजोरम के प्रमुख चर्चों का प्रतिनिधित्व करती है।

ज्ञापन में कहा गया कि नए कानून और उसके नियमों को भविष्य की तारीखों से ही लागू किया जाना चाहिए। इससे उन संस्थाओं पर बेवजह का जुर्माना नहीं लगेगा, जो दशकों से समाज सेवा में लगी हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जो संस्थाएं खुद अपनी इच्छा से विदेशी फंडिंग बंद करना चाहती हैं, उन्हें नियम तोड़ने वाला न माना जाए। यह उनका एक पारदर्शी और जिम्मेदार फैसला है।
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यह भी मांग की गई है कि ऐसी संस्थाओं की संपत्ति की सुरक्षा होनी चाहिए। इससे स्कूल, अस्पताल, अनाथालय और पुनर्वास केंद्र बिना किसी रुकावट के चलते रहेंगे। इससे पहले 10 जुलाई को 'कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया' ने भी अमित शाह को ज्ञापन दिया था। सीबीसीआई ने बिल को वापस लेने और सभी हितधारकों से परामर्श करके नया मसौदा तैयार करने की मांग की थी।
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