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पश्चिम बंगाल: चुनाव से पहले I-PAC निदेशक की गिरफ्तारी पर सियासत तेज, अभिषेक बनर्जी बोले- यह लोकतंत्र पर हमला

Tue, 14 Apr 2026 01:00 AM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता/नई दिल्ली।

सार

पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले आई-पीएसी के निदेशक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और एजेंसियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
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अभिषेक बनर्जी, टीएमसी नेता - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले आई-पीएसी के निदेशक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी पर सियासत तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इसको लेकर सरकार और केंद्र की एजेंसियों पर हमला किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विनेश चंदेल को धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया है। यह मामला कथित कोयला घोटाले से जुड़ा है। उन्हें दिल्ली में धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत हिरासत में लिया गया। 
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अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा?
उनकी गिरफ्तारी पर टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा,  ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की ओर बढ़ना चाहिए, इस तरह की कार्रवाई एक खौफनाक संदेश देती है- अगर आप विपक्ष के साथ काम करते हैं, तो अगला नंबर आपका हो सकता है। यह  लोकतंत्र नहीं, बल्कि धमकी है। इस दोहरे मापदंड को नजरअंदाज करना और भी मुश्किल हो जाता है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे लोगों को पाला बदलते ही संरक्षण मिल जाता है, जबकि अन्य लोगों को राजनीतिक रूप से से सुविधाजनक समय पर तुरंत निशाना बनाया जाता है। लोग अब इस बात से अनजान नहीं हैं। 

उन्होंने कहा, जब लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनी संस्थाएं दबाव के हथियार बनने लगती हैं, तो भरोसा कम होने लगता है। एक तरफ चुनाव आयोग, तो दूसरी तरफ ईडी, एनआईए, सीबीआई जैसी एजेंसियां सबसे संवेदनशील समय पर हस्तक्षेप करती हैं। इससे निष्पक्षता का नहीं, बल्कि भय का माहौल बनता है। 
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बनर्जी ने कहा, भारत को हमेशा अपने मुखर, थोड़ा अव्यवस्थित लेकिन आजाद लोकतंत्र पर गर्व रहा है। लेकिन आज कई लोग यह सवाल पूछने लगे हैं- क्या हम अब भी वही देश हैं? यह महज एक गिरफ्तारी का मामला नहीं है। बात यह है कि क्या हमारी संस्थाएं स्वतंत्र बनी रहेंगी और क्या हर नागरिक बिना किसी डर के चुनाव में भाग ले सकेगा,चाहे उसकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी हो। क्योंकि एक बार जब डर स्वतंत्रता की जगह ले लेता है, तो लोकतंत्र महज एक शब्द बनकर रह जाता है।

टीएमसी नेता ने आगे कहा, (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह और भाजपा के सत्ता तंत्र से कहूंगा- 4 और 5 मई को बंगाल में मौजूद रहें। (मुख्य चुनाव आयुक्त) ज्ञानेश कुमार और अपनी सभी एजेंसियों को साथ लेकर आएं। बंगाल न तो दबेगा, न चुप होगा और न ही झुकेगा। यह वह भूमि है, जो दबाव का जवाब प्रतिरोध से देती है और यह आपको बताएगी कि इसका क्या मतलब है। 

ईडी ने पहले भी की थी छापेमारी
इससे पहले दो अप्रैल को ईडी ने दिल्ली, बंगलूरू और मुंबई में छापेमारी की थी, जिसमें आई-पीएसी के सह-संस्थापक ऋषि राज सिंह, आम आदमी पार्टी के पूर्व संचार प्रमुख विजय नायर और अन्य से जुड़े ठिकाने शामिल थे। जनवरी में कोलकाता में आई-पीएसी के दफ्तर और इसके संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर भी छापे पड़े थे, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और दस्तावेज ले जाने का आरोप लगा।

ईडी ने आरोप लगाया कि जांच में बाधा डाली गई और जरूरी दस्तावेज तथा उपकरण जबरन ले लिए गए, जबकि टीएमसी और मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। इस मामले की पृष्ठभूमि 2020 की सीबीआई की प्राथमिकी से जुड़ी है, जिसमें पश्चिम बंगाल के कुनुस्तोरिया और काजोरा इलाकों में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से बड़े पैमाने पर कोयला चोरी का आरोप है।
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ईडी का यह भी दावा है कि इस कथित नेटवर्क से जुड़े हवाला ऑपरेटरों ने करोड़ों रुपये की रकम आई-पैक की कंपनी तक पहुंचाई। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है, ऐसे में यह मामला राजनीतिक रूप से और भी संवेदनशील हो गया है।


 
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